20% किशोर नशे के जोखिम में, सीजेआई सूर्या कांत ने पुनर्वास पर दिया जोर

पटना के लोक भवन में पाटलिपुत्र प्रज्ञा प्रवाह कार्यक्रम के दौरान संबोधित करते सीजेआई सूर्या कांत।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्या कांत ने शनिवार को पटना में चिंता जताते हुए कहा कि देश में 20 प्रतिशत से अधिक किशोर नशीली दवाओं के सेवन के मध्यम से उच्च जोखिम में हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि नशे का शिकार हुए बच्चों को केवल आंकड़ों के रूप में न देखा जाए, बल्कि उनके पुनर्वास और बचपन की पुनर्वापसी के लिए समग्र प्रयास किए जाने चाहिए।

पटना: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्या कांत ने देश में किशोरों के बीच बढ़ते नशे की लत पर गहरी चिंता व्यक्त की है। शनिवार को राजधानी पटना स्थित लोक भवन में आयोजित पाटलिपुत्र प्रज्ञा प्रवाह व्याख्यान श्रृंखला के तहत ‘ड्रग्स से परे बचपन: सुरक्षा, देखभाल और पुनर्वापसी’ विषय पर बोलते हुए सीजेआई ने बच्चों के संपूर्ण पुनर्वास और सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने का आह्वान किया।

लैंसेट अध्ययन का दिया हवाला सीजेआई सूर्या कांत ने ‘लैंसेट रीजनल हेल्थ – साउथईस्ट एशिया’ के अगस्त 2026 में प्रकाशित अध्ययन का संदर्भ देते हुए बताया कि भारत में पांच में से एक से अधिक किशोर (20% से अधिक) नशीली दवाओं के सेवन के मध्यम से उच्च जोखिम में हैं। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा दर्शाता है कि यह समस्या किसी छोटे वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि एक गंभीर चिंता का विषय है जिसके लिए देखभाल और निरंतर रोकथाम के प्रयासों की आवश्यकता है।

आंकड़ों के पीछे छिपी मानवीय स्थिति को समझने की अपील मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आंकड़ों के पीछे एक बच्चा और उसकी अलग परिस्थितियां छिपी होती हैं। बच्चे अक्सर साथियों के दबाव, उपेक्षा, घरेलू हिंसा, बेघर होने या गरीबी के कारण नशे के जाल में फंस जाते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं तो कुछ पढ़ाई के बावजूद समाज और परिवार से कट जाते हैं। इसलिए हर बच्चे की परिस्थिति के अनुसार अलग दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।

बचाव और पुनर्वास प्रक्रिया पर दिया बल सीजेआई सूर्या कांत ने एक ऐसी प्रणाली बनाने पर जोर दिया जहां बच्चों की सुरक्षा केवल उनके बचाव (रेस्क्यू) तक सीमित न रहे, इलाज केवल अस्पताल से छुट्टी मिलने तक न खत्म हो, और पुनर्वास ऐसा न हो कि बच्चा दोबारा नशे की गिरफ्त में चला जाए। उन्होंने पुनर्वास प्रक्रिया में बच्चों की गोपनीयता, गरिमा और आत्म-सम्मान को बनाए रखने को सबसे प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल करने की बात कही।

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