पश्चिम मेदिनीपुर: बिजली की चपेट में आने से तीन हाथियों की मौत, हड़कंप

पश्चिम मेदिनीपुर के हरतारा में धान के खेत में मृत पड़े हाथियों के शव

पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के पीराकाटा रेंज अंतर्गत हरतारा इलाके में रविवार सुबह एक हाथी और दो शावकों के शव धान के खेत में मिले। प्रारंभिक जांच में मौत का कारण करंट लगना माना जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। सुनील दास की रिपोर्ट।

पश्चिम मेदिनीपुर के पीराकाटा में खेत में मिले हाथियों के शव

पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर में पीराकाटा रेंज के रंजा बीट अंतर्गत हरतारा क्षेत्र में रविवार सुबह एक मादा हाथी और दो शावकों के शव धान के खेत में पड़े मिलने से हड़कंप मच गया। घटना की खबर फैलते ही आसपास के इलाकों से भारी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए।

स्थानीय लोगों के अनुसार, शनिवार रात भर जंगल से सटे इलाके में हाथियों की चिंघाड़ सुनाई दे रही थी। सुबह जब ग्रामीण धान के खेतों की तरफ गए, तो तीन हाथियों को मृत अवस्था में पाया।

कृषि पंप के बिजली तार की चपेट में आने की आशंका

जिस धान के खेत में हाथियों के शव मिले, उसके ऊपर से बिजली का तार गुजर रहा था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह बिजली कनेक्शन कृषि कार्यों के लिए पंप चलाने हेतु लगाया गया था। आशंका जताई जा रही है कि हाथी इस तार के संपर्क में आ गए, जिससे करंट लगने से उनकी मौत हो गई।

मेदिनीपुर के डीएफओ (Divisional Forest Officer) जोन्स जस्टिन ने बताया कि प्रारंभिक निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि तीनों हाथियों की मौत करंट लगने से हुई है। पूरे मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्र से गुजर रही बिजली की लाइन अवैध रूप से बिछाई गई थी या नहीं, इसकी जांच पीराकाटा वन प्रभाग के अधिकार क्षेत्र से बाहर का विषय है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार, ग्रामीणों ने उठाई सुरक्षा की मांग

वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, तीनों हाथियों के शवों के पोस्टमार्टम की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत के सटीक कारणों का पता चल सकेगा।

स्थानीय निवासी बामापद दास ने बताया कि क्षेत्र में 30 से 40 हाथियों का झुंड अक्सर आवाजाही करता है। रात में हाथियों के चिंघाड़ने की आवाजें आ रही थीं, लेकिन सुबह ही इस हादसे की जानकारी हुई। उन्होंने वन विभाग से हाथियों की निगरानी बढ़ाने और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं एक अन्य ग्रामीण कार्तिक देबसिंह ने घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए कृषि क्षेत्रों में बिछाई गई बिजली लाइनों की जांच और सुरक्षात्मक उपाय लागू करने की अपील की है।

गौरतलब है कि जंगलमहल क्षेत्र में करंट लगने से हाथियों की मौत की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। रिहाइशी इलाकों में हाथियों की बढ़ती आवाजाही के बीच बिजली के तारों की सुरक्षा पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

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