मिडिल ईस्ट संघर्ष: हूती विद्रोहियों की एंट्री से बढ़ा तनाव

Houthi rebels missile attack in Middle East conflict impacting global stability

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष में नया मोड़ आ गया है, जहां ईरान को अब हूती विद्रोहियों का समर्थन मिल गया है। शनिवार को इजरायल पर मिसाइल हमलों के साथ इस समूह ने युद्ध में प्रवेश किया, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका है।

मिडिल ईस्ट संघर्ष: हूती विद्रोहियों की एंट्री से बढ़ा दायरा

मिडिल ईस्ट संघर्ष ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। यूएस और इजरायल द्वारा ईरान में हमलों के बाद शुरू हुए इस युद्ध में अब ईरान को हूती विद्रोहियों का समर्थन मिल गया है।

शनिवार को हूती लड़ाकों ने इजरायल पर कई मिसाइलें दागीं। दक्षिणी इजरायल में हुए इन हमलों के साथ ही उन्होंने युद्ध में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।

हूती विद्रोही कौन हैं

हूती यमन का एक राजनीतिक और सैन्य समूह है, जो 2000 के दशक में उभरा। इस समूह का नाम इसके संस्थापक हुसैन अल-हूती के नाम पर रखा गया है।

यह समूह मुख्य रूप से शिया इस्लाम के जैदी संप्रदाय से जुड़ा है और उत्तरी यमन के अधिकांश हिस्सों पर नियंत्रण रखता है। हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है, हालांकि वे सीधे तौर पर उसके प्रतिनिधि नहीं माने जाते।

यमन में संघर्ष का इतिहास

हूती विद्रोही 2014 में चर्चा में आए थे, जब उन्होंने यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद देश में गृह युद्ध शुरू हो गया था।

सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने हस्तक्षेप किया, लेकिन हूती विद्रोहियों को पूरी तरह हटाया नहीं जा सका। लंबे संघर्ष के बाद 2022 में युद्धविराम हुआ, हालांकि इसके बाद भी हिंसक घटनाएं जारी रहीं।

युद्ध पर संभावित प्रभाव

हूती विद्रोहियों के पास आधुनिक हथियार और मिसाइलें हैं, जिन्हें वे अब स्वयं भी विकसित कर रहे हैं। उनके युद्ध में शामिल होने से संघर्ष के और फैलने की आशंका जताई जा रही है।

यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो इसका असर वैश्विक स्तर पर पड़ सकता है। संभावित प्रभावों में तेल की कीमतों में वृद्धि, गैस की कमी और महंगाई में बढ़ोतरी शामिल हैं।

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