नई दिल्ली में विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में लगभग 80% किशोरियों को मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं के कारण दैनिक जीवन प्रभावित होता है। 6 अप्रैल 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, करीब 30% छात्राएं स्कूल छोड़ती हैं। विशेषज्ञों ने दीर्घकालिक समाधान के रूप में होम्योपैथी को प्रभावी विकल्प बताया।
मासिक स्वास्थ्य चुनौतियों पर बढ़ती चिंता
नई दिल्ली: देश में किशोरियों के बीच मासिक धर्म से जुड़ी समस्याएं एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती के रूप में सामने आ रही हैं। सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन होम्योपैथी (CCRH) के कार्यक्रमों से जुड़े निष्कर्षों के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत किशोरियों को इन समस्याओं के कारण दैनिक गतिविधियों में बाधा आती है, जबकि करीब 30 प्रतिशत छात्राएं स्कूल नहीं जा पातीं।
वर्ल्ड होम्योपैथी डे से पहले बढ़ा फोकस
10 अप्रैल को मनाए जाने वाले वर्ल्ड होम्योपैथी डे, जिसकी थीम “Homoeopathy for Sustainable Health” है, से पहले मासिक स्वास्थ्य के लिए दीर्घकालिक और समग्र उपचार पद्धतियों पर ध्यान बढ़ा है।
सुरक्षित और किफायती विकल्प के रूप में होम्योपैथी
केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि महिलाओं के समग्र स्वास्थ्य और गरिमा के लिए मासिक स्वास्थ्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि होम्योपैथी दीर्घकालिक बीमारियों के प्रबंधन में सुरक्षित, किफायती और टिकाऊ विकल्प प्रदान करती है।
आयुष मंत्रालय की पहल
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि ऐसी स्वास्थ्य प्रणाली की आवश्यकता है जो प्रभावी, सुलभ और मरीज के अनुकूल हो। उनके अनुसार, होम्योपैथी अपनी व्यक्तिगत उपचार पद्धति के माध्यम से दीर्घकालिक मासिक विकारों के समाधान में योगदान दे सकती है।
CCRH के शोध और कार्यक्रम
CCRH द्वारा 24 राज्यों और 127 स्कूलों में 10,000 से अधिक किशोरियों पर किए गए पहले चरण के अध्ययन में यह सामने आया कि बड़ी संख्या में लड़कियां मासिक समस्याओं से प्रभावित हैं। यह अध्ययन 2024 और 2025 में किया गया, जिसके निष्कर्ष इस वर्ष की शुरुआत में संकलित किए गए।
दूसरे चरण में विस्तार
कार्यक्रम के दूसरे चरण को 16 से अधिक राज्यों और 54 स्कूलों तक विस्तारित किया जा रहा है, जिसमें 10,000 से अधिक किशोरियों को शामिल किया जाएगा। इस चरण में जागरूकता बढ़ाने, स्वच्छता को बढ़ावा देने और होम्योपैथिक उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
दीर्घकालिक बीमारियों में संभावनाएं
विशेषज्ञों के अनुसार, मासिक धर्म से जुड़ी समस्याएं जैसे अनियमित चक्र, दर्द (डिसमेनोरिया) और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) जैसी स्थितियों के लिए लंबे समय तक देखभाल की आवश्यकता होती है। ऐसे में कई मरीज गैर-आक्रामक और समग्र उपचार विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
CCRH के महानिदेशक डॉ. सुभाष कौशिक ने कहा कि महिलाओं का स्वास्थ्य एक स्वस्थ समाज की नींव है और व्यक्तिगत होम्योपैथिक उपचार लक्षणों को कम करने और जीवन की गुणवत्ता सुधारने में सहायक हो सकता है।
शोध में सकारात्मक संकेत
शोधों में मासिक अनियमितता, PCOS, गर्भाशय फाइब्रॉइड और रजोनिवृत्ति से जुड़े लक्षणों में सुधार के संकेत मिले हैं। अध्ययनों के अनुसार, होम्योपैथी से चक्र नियमित करने और समग्र स्वास्थ्य में सुधार देखा गया है।
