नई दिल्ली में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच नीतिगत दरों को स्थिर रखा है। विशेषज्ञों ने कहा कि FY27 के लिए विकास दर अनुमान घटकर 6.9% हो गया है और आगे की नीति में सतर्क रुख अपनाया जाएगा, साथ ही संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता जताई गई है।
RBI दर स्थिर, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सतर्क रुख
नई दिल्ली में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नीतिगत दरों को स्थिर रखने के फैसले को व्यापक रूप से अपेक्षित माना गया। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मौद्रिक नीति की प्रभावशीलता अब सीमाओं के करीब पहुंच रही है।
FY27 के लिए विकास दर का अनुमान घटाकर 6.9 प्रतिशत किया गया है, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। ऐसे में केंद्रीय बैंक फिलहाल दरों में बदलाव को लेकर जल्दबाजी में नहीं है।
विशेषज्ञों ने जताई सतर्कता की जरूरत
CareEdge Ratings की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा दरों को स्थिर रखना अपेक्षित था।
उन्होंने कहा कि उच्च ऊर्जा कीमतों और सप्लाई बाधाओं के कारण FY27 के लिए GDP वृद्धि अनुमान 6.9 प्रतिशत किया गया है, जबकि उनके अनुसार यह 6.7 प्रतिशत रह सकता है।
महंगाई और कच्चे तेल पर नजर
RBI ने FY27 के लिए महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों का असर महंगाई पर पड़ेगा, हालांकि इसका बोझ सरकार, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और उपभोक्ताओं के बीच साझा हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि वेस्ट एशिया में घोषित दो सप्ताह के युद्धविराम के असर पर आगे स्थिति निर्भर करेगी।
रुपया और बाजार पर प्रभाव
रजनी सिन्हा के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव में कमी से रुपये को कुछ समर्थन मिल सकता है। हालांकि विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए RBI सतर्क रहेगा।
FY27 में USD/INR के 92-93 के स्तर पर रहने का अनुमान जताया गया है, बशर्ते कच्चे तेल की औसत कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल रहे।
रेपो रेट 5.25% पर बरकरार
कोटक महिंद्रा एएमसी के अभिषेक बिसेन ने बताया कि मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखा और रुख न्यूट्रल रखा।
उन्होंने कहा कि वेस्ट एशिया का युद्ध GDP के लिए जोखिम और महंगाई के लिए दबाव दोनों पैदा कर सकता है।
संरचनात्मक सुधारों पर जोर
अर्था भारत इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के सचिन सावरिकर ने कहा कि RBI का फैसला व्यावहारिक है, लेकिन यह भी दर्शाता है कि केवल मौद्रिक नीति से अब सीमित प्रभाव ही संभव है।
उन्होंने कहा कि लगभग 125 बेसिस पॉइंट की राहत के बाद आगे दरों में कटौती का प्रभाव सीमित रहेगा।
सावरिकर ने विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए टैक्स स्पष्टता, नियामकीय सरलता और बाजार पहुंच में सुधार जैसे संरचनात्मक कदमों की आवश्यकता पर जोर दिया।
निवेश प्रवाह पर बढ़ती चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और सख्त लिक्विडिटी के बीच विदेशी निवेशक अब अधिक चयनात्मक हो गए हैं।
ऐसे में भारत को सतत निवेश प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए व्यापक नीतिगत सुधारों पर ध्यान देना होगा।
