पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार (5 मई 2026) को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। उन्होंने आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया और इसे लोकतंत्र की हत्या बताते हुए उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की।
राष्ट्रपति को सौंपा गया ज्ञापन
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर आम आदमी पार्टी (आप) के सात राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में मुख्यमंत्री ने इस पूरे घटनाक्रम को ‘संवैधानिक उल्लंघन’ और ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है।
मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए भगवंत मान ने कहा कि हाल ही में आप के सात राज्यसभा सदस्यों का भाजपा में जाना संविधान की मूल भावनाओं के खिलाफ है। उन्होंने बताया कि उनके शिष्टमंडल ने इन सांसदों की सदस्यता तुरंत रद्द करने की मांग की है। मान के अनुसार, इन सांसदों ने भाजपा में विलय से पहले खुद को एक ‘अलग दल’ के रूप में पेश करने का जो दावा किया है, वह पूरी तरह निराधार और असंवैधानिक है।
पंजाब की अस्मिता पर मान की दो-टूक
मुख्यमंत्री ने भाजपा नेताओं के उन बयानों पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें पश्चिम बंगाल के बाद पंजाब को अगला राजनीतिक लक्ष्य बताया जा रहा था। मान ने दो-टूक शब्दों में कहा:
“पंजाब कोई ट्रक नहीं है कि कोई भी आए और इसे अपनी मर्जी से चलाने लगे। यह वह राज्य है जिसने देश की अस्मिता पर आंच आने पर हमेशा सबसे पहले कुर्बानी दी है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार पंजाब में अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने की कोशिश करेगी, तो उसे कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा। मान ने कटाक्ष करते हुए यह भी कहा कि भाजपा के पास वर्तमान में पंजाब में केवल दो विधायक हैं और आने वाले चुनावों में यह संख्या शून्य तक भी पहुंच सकती है।
