मोतिहारी: 10वीं के छात्र ने टेलिस्कोप से कैद की International Space Station की तस्वीर

मोतिहारी के छात्र मोहम्मद एहान अपने टेलिस्कोप के साथ इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की तस्वीरें लेते हुए।

बिहार के मोतिहारी में माउंट लिटेरा जी स्कूल के 10वीं कक्षा के छात्र मोहम्मद एहान ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए अंतरिक्ष में 400 किलोमीटर ऊपर स्थित इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड किए हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद, छात्र ने टेलिस्कोप और मोबाइल की मदद से पृथ्वी की परिक्रमा कर रही इस प्रयोगशाला को सफलतापूर्वक ट्रैक किया।

मोतिहारी के छात्र का कमाल: संसाधनों की कमी के बावजूद कैमरे में कैद किया ‘अंतरिक्ष का अजूबा’

मोतिहारी: चंपारण की धरती प्रतिभाओं की जननी रही है और इसे एक बार फिर सच कर दिखाया है मोतिहारी के एक स्कूली छात्र ने। जहां महानगरों के बच्चे आधुनिक लैब्स पर निर्भर हैं, वहीं मोतिहारी के मोहम्मद एहान ने अपने जुनून और रिसर्च के दम पर आसमान की ऊंचाइयों को छू लिया है। एहान ने पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर तैरते इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) को न केवल ट्रैक किया, बल्कि उसकी स्पष्ट तस्वीरें और वीडियो भी अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिए।

क्या है इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS)?

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन विज्ञान का एक ऐसा चमत्कार है जो फुटबॉल के मैदान जितना विशाल (लगभग 109 मीटर लंबा और 74 मीटर चौड़ा) है। करीब 4 लाख 20 हजार किलोग्राम वजनी यह स्टेशन 7.8 किलोमीटर प्रति सेकेंड की अविश्वसनीय रफ्तार से पृथ्वी का चक्कर लगाता है। वर्तमान में इसमें सात अंतरिक्ष यात्री मौजूद हैं, जो लगातार वैज्ञानिक शोध में जुटे रहते हैं।

धैर्य और तकनीक का संगम

माउंट लिटेरा जी स्कूल में दसवीं के छात्र मोहम्मद एहान के लिए यह उपलब्धि आसान नहीं थी। आसमान में तेज रफ्तार से गुजरती एक छोटी सी रोशनी को पहचानना और उसे टेलिस्कोप के लेंस पर केंद्रित करना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है। बीती शाम जब ISS मोतिहारी के ऊपर से गुजर रहा था, तब एहान ने धैर्यपूर्वक इसे ट्रैक किया और अपने साधारण टेलिस्कोप व मोबाइल फोन के तालमेल से इसे रिकॉर्ड करने में सफलता प्राप्त की।

छोटे शहर के बड़े सपने

एहान द्वारा रिकॉर्ड की गई यह ‘उड़ती हुई प्रयोगशाला’ की तस्वीरें अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। भारत मंथन लाइव न्यूज़ के अनुसार, छात्र की यह सफलता यह संदेश देती है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो सीमित संसाधनों में भी अंतरिक्ष विज्ञान जैसे जटिल विषयों में महारत हासिल की जा सकती है। यह उपलब्धि न केवल मोतिहारी बल्कि पूरे बिहार के छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है।

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