भागलपुर: विक्रमशिला पुल टूटने से बढ़ी मुसीबत, नाव से हो रही दुल्हनों की विदाई

भागलपुर में विक्रमशिला पुल टूटने के कारण नाव के सहारे गंगा नदी पार करते दूल्हा और दुल्हन।

बिहार के भागलपुर जिले में विक्रमशिला पुल का हिस्सा गंगा नदी में समा जाने के बाद जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। पुल टूटने के कारण सड़क संपर्क भंग होने से अब नवविवाहित जोड़ों को भी नाव के सहारे नदी पार करनी पड़ रही है। स्थानीय निवासियों में प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

भागलपुर: विक्रमशिला पुल टूटने से यातायात ठप, नाव बनी नवविवाहितों का सहारा

भागलपुर: बिहार के भागलपुर जिले में पिछले दिनों विक्रमशिला पुल का एक हिस्सा बीच से टूटकर गंगा नदी में गिरने के बाद से स्थिति गंभीर बनी हुई है। पुल के क्षतिग्रस्त होने से आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है, जिसका सबसे अधिक असर शादी-विवाह के इस सीजन में बारातियों और आम यात्रियों पर पड़ रहा है।

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा पुल, बाराती परेशान

विक्रमशिला पुल के टूटने के कारण अब भारी वाहनों, कारों और बसों का परिचालन बंद है। ऐसे में मजबूरीवश लोग गंगा नदी पार करने के लिए छोटी नावों का सहारा ले रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी भ्रष्टाचार के कारण पुल धराशायी हुआ है, जिससे जनता को अब जोखिम भरी यात्रा करनी पड़ रही है।

नाव पर विदाई: मजबूरी में निभाई जा रही परंपराएं

विक्रमशिला पुल के समीप इन दिनों एक अजीबोगरीब स्थिति देखी जा रही है। शादी समारोहों के बाद दूल्हा-दुल्हन को विदाई के वक्त नाव पर सवार होकर नदी पार करनी पड़ रही है। ऐसे कई दृश्य सामने आए हैं जहाँ दूल्हा एक हाथ में विदाई का सामान और दूसरे हाथ से अपनी नई-नवेली दुल्हन का हाथ पकड़कर उसे सावधानीपूर्वक नाव पर चढ़ा रहा है।

आम जनता और दैनिक यात्रियों में रोष

पुल टूटने का प्रभाव केवल शादियों तक सीमित नहीं है। दैनिक मजदूरों और रोजमर्रा के यात्रियों को भी हर दिन भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। भारत मंथन लाइव न्यूज़ से बातचीत में स्थानीय लोगों ने बताया कि बसों और निजी वाहनों के रास्ते बंद होने से समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है।

लोगों ने प्रशासन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि विशेष आयोजनों और आपातकालीन स्थितियों में लोगों को जो दर्द झेलना पड़ रहा है, उसका सरकारी नुमाइंदों को अंदाजा भी नहीं है। वर्तमान में लोग जान जोखिम में डालकर गंगा नदी पार करने और अपनी परंपराओं को निभाने को मजबूर हैं।

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