मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते तनाव और पेट्रोल-डीजल की किल्लत के बीच दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 14 मई 2026 को बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री की अपील के बाद आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए दिल्ली के सरकारी दफ्तरों में सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम (WFH) लागू करने का निर्णय लिया गया है।
ईंधन संकट के बीच दिल्ली सरकार का बड़ा कदम, सरकारी कर्मचारियों को मिला वर्क फ्रॉम होम
दिल्ली: मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और वैश्विक तनाव का असर अब भारतीय ईंधन बाजार पर भी दिखने लगा है। देश में उत्पन्न पेट्रोल-डीजल की किल्लत को देखते हुए दिल्ली सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली के सरकारी कार्यालयों में हर हफ्ते दो दिन वर्क फ्रॉम होम (घर से काम) की व्यवस्था शुरू करने का आधिकारिक निर्णय लिया है।
यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश की आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने और ईंधन संरक्षण के लिए की गई राष्ट्रीय अपील के बाद उठाया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने संकट से निपटने और संसाधन प्रबंधन के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार की है।
निजी दफ्तरों के लिए भी तैयारी, अफसरों और मंत्रियों के कोटे में कटौती
प्राइवेट सेक्टर में भी नियम लागू करने की कोशिश
प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील के मद्देनजर आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए एक विशेष योजना तैयार की गई है। सरकार की योजना के अनुसार, सरकारी कार्यालयों के साथ-साथ निजी (प्राइवेट) दफ्तरों में भी सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम के इस नियम को लागू कराने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।
सरकारी काफिलों और ईंधन कोटे में 20 फीसदी की कमी
ईंधन की भारी बचत सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली सरकार ने मंत्रियों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के काफिलों पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए हैं।
“अधिकारियों को मिलने वाले मासिक पेट्रोल और डीजल के कोटे में तत्काल प्रभाव से 20 प्रतिशत की कटौती की गई है,” मुख्यमंत्री ने घोषणा की।
यह कटौती उन सभी श्रेणी के सरकारी अफसरों पर लागू होगी जिन्हें वर्तमान में प्रशासनिक कार्यों के लिए प्रति माह 200 से 250 लीटर पेट्रोल या डीजल आवंटित किया जाता था। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्तर पर ईंधन की खपत को नियंत्रित करना है।
