रांची मारवाड़ी कॉलेज की ऑटोनॉमी खत्म, 15 हजार छात्रों की बढ़ी चिंता

रांची के मारवाड़ी कॉलेज परिसर के बाहर जमा छात्र ऑटोनॉमी खत्म होने की खबर के बाद चिंता व्यक्त करते हुए।

रांची के मारवाड़ी कॉलेज का स्वायत्त (ऑटोनॉमस) दर्जा शैक्षणिक सत्र 2026-27 से समाप्त होने जा रहा है, जिससे यहां पढ़ रहे 15,000 से अधिक छात्र-छात्राओं की चिंताएं बढ़ गई हैं। लगभग 17 वर्षों बाद यह संस्थान एक बार फिर पूरी तरह से रांची यूनिवर्सिटी की पारंपरिक व्यवस्था के अधीन संचालित होगा।

रांची मारवाड़ी कॉलेज की स्वायत्तता समाप्त, रांची यूनिवर्सिटी संभालेगी कमान

रांची का प्रतिष्ठित मारवाड़ी कॉलेज आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से अपनी स्वायत्त (ऑटोनॉमस) व्यवस्था से बाहर हो जाएगा। पिछले 17 वर्षों से एक स्वायत्त संस्थान के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखने के बाद अब यह कॉलेज दोबारा रांची यूनिवर्सिटी की पारंपरिक प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था के तहत काम करेगा। इस बड़े प्रशासनिक बदलाव का सीधा असर कॉलेज के 15 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं पर पड़ने की संभावना है।

इस व्यवस्था के प्रभावी होने के बाद मारवाड़ी कॉलेज की परीक्षाओं का आयोजन, परीक्षा परिणाम, पाठ्यक्रम (सिलेबस), मूल्यांकन प्रणाली और संपूर्ण शैक्षणिक कैलेंडर का नियंत्रण वापस रांची यूनिवर्सिटी के पास चला जाएगा। अब कॉलेज प्रशासन अपने स्तर पर स्वतंत्र रूप से परीक्षाएं आयोजित करने, समय पर रिजल्ट घोषित करने या सिलेबस में आधुनिक बदलाव करने जैसे नीतिगत निर्णय नहीं ले सकेगा।

लेटलतीफी के डर से छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता

मारवाड़ी कॉलेज का ऑटोनॉमस स्टेटस खत्म होने की सूचना के बाद से ही विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के बीच भविष्य को लेकर चिंताएं तेज हो गई हैं। रांची यूनिवर्सिटी की पुरानी कार्यप्रणाली में परीक्षाओं में देरी, परीक्षा परिणामों के लटकने और शैक्षणिक सत्र के नियमित न रहने को लेकर पहले भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। छात्रों को मुख्य रूप से यह डर सता रहा है कि यूनिवर्सिटी के अधीन जाने से कॉलेज का सुव्यवस्थित सत्र एक बार फिर अनियमितताओं की भेंट चढ़ सकता है।

साल 2009 में मिला था विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से ऑटोनॉमस स्टेटस

मारवाड़ी कॉलेज को साल 2009 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से ऑटोनॉमस कॉलेज का दर्जा प्रदान किया गया था। इस स्टेटस को प्राप्त करने के बाद कॉलेज ने अपनी एक स्वतंत्र और सुदृढ़ परीक्षा प्रणाली विकसित की थी। इसके तहत समय-समय पर बाजार की मांग के अनुसार सिलेबस को अपडेट किया गया और कई नए प्रोफेशनल व जॉब ओरिएंटेड कोर्स भी सफलतापूर्वक शुरू किए गए।

नियमित अंतराल पर परीक्षाएं संपन्न कराने और त्वरित गति से रिजल्ट जारी करने के कारण ही मारवाड़ी कॉलेज ने पूरे झारखंड में अपनी एक विशिष्ट शैक्षणिक साख स्थापित की थी। यही मुख्य वजह थी कि हर साल स्नातक और स्नातकोत्तर कोर्स में दाखिला लेने के लिए राज्यभर से रिकॉर्ड संख्या में छात्र यहां आवेदन करते थे।

साल 2021 में भी सामने आई थी ऐसी ही स्थिति

यह पहला मौका नहीं है जब मारवाड़ी कॉलेज की ऑटोनॉमी पर संकट आया है या यह समाप्त हो रही है। इससे पहले साल 2021 में भी कॉलेज का स्वायत्त दर्जा समाप्त कर दिया गया था। उस दौरान परीक्षा और रिजल्ट से जुड़ी पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया रांची यूनिवर्सिटी के नियंत्रण में चली गई थी, जिसका सीधा प्रतिकूल प्रभाव कॉलेज के शैक्षणिक सत्र पर देखने को मिला था।

उस समय कई संकायों के छात्रों के रिजल्ट महीनों की देरी से घोषित किए गए थे और पूरा सत्र पीछे खिसक गया था। हालांकि, बाद में जब कॉलेज को दोबारा ऑटोनॉमी वापस मिली, तब प्रबंधन ने कड़ी मशक्कत कर परीक्षा कैलेंडर को फिर से व्यवस्थित किया और सत्र को नियमित पटरी पर लौटाया था।

करियर और प्लेसमेंट को लेकर पसरा असमंजस

वर्तमान में ऑटोनॉमी खत्म होने की आधिकारिक खबर के बाद कॉलेज परिसरों में छात्रों के बीच भविष्य की रणनीतियों को लेकर चर्चाएं गर्म हैं। विशेष रूप से वे विद्यार्थी अत्यधिक परेशान हैं जो अंतिम वर्ष में हैं और विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं, कैंपस प्लेसमेंट या उच्च शिक्षा के लिए अन्य बड़े संस्थानों में दाखिले की तैयारी कर रहे हैं।

अभिभावकों का भी स्पष्ट मानना है कि यदि रांची यूनिवर्सिटी के नियंत्रण में जाने के बाद सत्र समय पर पूरा नहीं हुआ, तो इसका सीधा नुकसान छात्रों के करियर और उनके प्लेसमेंट के अवसरों को उठाना पड़ेगा। फिलहाल, इस पूरे गंभीर विषय पर कॉलेज प्रबंधन और रांची यूनिवर्सिटी की अगली रणनीतिक घोषणाओं पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। इस मामले से जुड़ी हर प्रामाणिक रिपोर्ट के लिए भारत मंथन लाइव न्यूज (Bharat Manthan Live News) के साथ बने रहें।

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