अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 13 पैसे और टूटकर 96.83 (अंतिम) के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। पश्चिम एशिया संकट के बीच वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल के कारण लगातार नौवें सत्र में रुपये में यह गिरावट दर्ज की गई है।
लगातार नौवें सत्र में फिसला रुपया, वैश्विक संकट के बीच बढ़ीं महंगाई की चिंताएं
मुंबई: विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये की गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार नौवें कारोबारी सत्र में कमजोर होकर 96.83 (अंतिम) के नए ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट के कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने बाजार में मुद्रास्फीति (महंगाई) की चिंताओं को बढ़ा दिया है, जिसका सीधा असर घरेलू मुद्रा पर पड़ा है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में बुधवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.89 पर खुला था। कारोबार के दौरान इसने 96.65 का उच्च स्तर और 96.95 का अब तक का सबसे निचला रिकॉर्ड स्तर छुआ। अंत में यह अपने पिछले बंद भाव के मुकाबले 13 पैसे की गिरावट दर्ज करते हुए 96.83 (अंतिम) पर बंद हुआ। इससे पिछले कारोबारी सत्र में भी रुपये में 50 पैसे की भारी गिरावट आई थी और यह 96.70 पर बंद हुआ था।
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल और मजबूत डॉलर का दिखा असर
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, मजबूत होते डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (बॉन्ड रिफंड) में आए उछाल ने रुपये को नए निचले स्तर पर धकेल दिया है। अमेरिका में 30 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड दो दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, जबकि 10 वर्षीय यील्ड 16 महीने के उच्च स्तर पर दर्ज की गई। इस बदलाव ने वैश्विक बाजारों में महंगाई की चिंताओं को और गहरा कर दिया है, जिससे वैश्विक बाजारों में बिकवाली का माहौल बना और निवेशक जोखिम लेने से बचते नजर आए।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और बढ़ती महंगाई की चिंताओं के कारण आने वाले समय में भी रुपये पर नकारात्मक दबाव बना रह सकता है। मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को भी कम कर दिया है। आने वाले दिनों में यूएसडी/आईएनआर (USD/INR) की हाजिर कीमत 96.50 रुपये से 97.10 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकती है।
नीति निर्माताओं और निवेशकों के लिए बढ़ीं आर्थिक चुनौतियां
रुपये की इस तेज और लगातार गिरावट ने देश के नीति निर्माताओं, संस्थागत निवेशकों और व्यापारिक जगत के लिए एक बड़ा आर्थिक चेतावनी संकेत खड़ा कर दिया है। किसी समय एशिया की सबसे स्थिर मुद्राओं में गिना जाने वाला भारतीय रुपया अब इस साल की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली उभरती बाजार मुद्राओं में से एक बन गया है। इस गिरावट के पीछे महंगे कच्चे तेल, देश से विदेशी पूंजी की लगातार निकासी, बढ़ते व्यापार घाटे और मजबूत होते अमेरिकी डॉलर का मुख्य हाथ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स 0.09 प्रतिशत की बढ़त के साथ 99.42 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 2.77 प्रतिशत की गिरावट के साथ 109.95 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेंड कर रहा था। इस बीच, अमेरिकी सीनेट ने मंगलवार को उस कानून को आगे बढ़ाया है जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ईरान युद्ध से पीछे हटने के लिए बाध्य करता है, जिसमें कई रिपब्लिकन सांसदों ने ट्रम्प की इच्छाओं के खिलाफ जाकर वोट किया।
घरेलू शेयर बाजार में मामूली बढ़त, विदेशी निवेशकों ने की बिकवाली
विदेशी मुद्रा बाजार में मची उथल-पुथल के बीच घरेलू शेयर बाजार बुधवार को मामूली बढ़त के साथ बंद होने में कामयाब रहे। बंबई स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स 117.54 अंक बढ़कर 75,318.39 पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 41 अंक चढ़कर 23,659 पर बंद हुआ।
एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, लगातार तीन सत्रों तक लिवाल रहने के बाद विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) एक बार फिर बिकवाल बन गए। विदेशी निवेशकों ने मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार से 2,457.49 करोड़ रुपये की इक्विटी (शेयर) बेचकर पूंजी बाहर निकाली। देश और दुनिया की आर्थिक जगत से जुड़ी हर प्रामाणिक और सटीक रिपोर्ट के लिए भारत मंथन लाइव न्यूज (Bharat Manthan Live News) के साथ बने रहें।
