कोल इंडिया लिमिटेड ने कोयला खदानों से निकलने वाले पानी को रीसाइकिल कर ‘कोल नीर’ ब्रांड नाम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की एक महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है। कोयला मंत्रालय के निर्देश पर इस परियोजना के तहत धनबाद के पुटकी बालिहारी क्षेत्र में एक आधुनिक बॉटलिंग प्लांट स्थापित किया जा रहा है, जिसका उत्पादन इसी वर्ष शुरू करने का लक्ष्य है।
कोयला उत्पादन के बाद अब पेयजल क्षेत्र में उतरेगी कोल इंडिया, वेस्ट टू वेल्थ पर जोर
धनबाद — कोयला मंत्रालय के निर्देशानुसार कोल इंडिया लिमिटेड अब कोयला उत्पादन के साथ-साथ पेयजल आपूर्ति के क्षेत्र में भी कदम रखने जा रही है। कंपनी अपनी एक नई और अनूठी पहल के तहत कोयला खदानों से निकलने वाले पानी को रीसाइकिल कर ‘कोल नीर’ ब्रांड नाम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की तैयारी में है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए धनबाद के पुटकी बालिहारी क्षेत्र को चुना गया है, जहां एक आधुनिक बॉटलिंग प्लांट स्थापित किया जा रहा है।
कोयला मंत्रालय इस पूरी परियोजना को लेकर बेहद गंभीर है और इसकी प्रगति की हर महीने उच्च स्तरीय समीक्षा की जाएगी। इस कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए कोल इंडिया की हर अनुषंगी कंपनी में अधिकारियों की एक विशेष टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई है। धनबाद के पुटकी में लगाए जा रहे इस आधुनिक प्लांट से इसी वर्ष (2026) के भीतर पेयजल उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मेकॉन कंपनी को मिली डिजाइन और स्थापना की जिम्मेदारी
इस पूरे प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने का जिम्मा देश की प्रतिष्ठित कंपनी मेकॉन (MECON) को सौंपा गया है। मेकॉन इस आधुनिक बॉटलिंग प्लांट की पूरी डिजाइनिंग, तकनीकी कार्य और स्थापना की जिम्मेदारी निभा रही है। वर्तमान में पुटकी बालिहारी क्षेत्र में प्लांट निर्माण का कार्य बेहद तेज गति से चल रहा है।
इस परियोजना की सफलता की सीधे तौर पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा भी निगरानी की जा रही है। कोल इंडिया के इस कदम को पर्यावरण संरक्षण और संसाधन प्रबंधन के तहत ‘वेस्ट टू वेल्थ’ (कचरे से कंचन) की दिशा में एक बहुत बड़ा और प्रभावी प्रयास माना जा रहा है।
सफल होने पर अन्य अनुषंगी कंपनियों में भी लागू होगा मॉडल
पुटकी बालिहारी से हो रही है इस बड़ी परियोजना की शुरुआत
इस परियोजना की शुरुआत भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) के पुटकी बालिहारी क्षेत्र से की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, यदि धनबाद में यह मॉडल पूरी तरह से सफल रहता है, तो इस कोल नीर परियोजना के प्रारूप को कोल इंडिया की अन्य सभी अनुषंगी कंपनियों (Subsidiaries) के कार्यक्षेत्रों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इससे खदानों के व्यर्थ बहने वाले पानी का सही उपयोग हो सकेगा और स्थानीय स्तर पर शुद्ध पेयजल की उपलब्धता बढ़ेगी।
