बिहार के मोतीहारी में भारत-नेपाल सीमा के पास स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और मिलिट्री इंटेलिजेंस ने एक संयुक्त कार्रवाई में अंतरराष्ट्रीय तस्कर दया शंकर तिवारी उर्फ सुशील तिवारी को गिरफ्तार किया है। हरैया थाना कांड संख्या 23/26 का यह मुख्य वांटेड आरोपी भारत, नेपाल और बांग्लादेश में जाली नोट छापने का नेटवर्क चला रहा था।
मोतीहारी में संयुक्त ऑपरेशन के दौरान धरा गया हरैया थाने का मुख्य वांटेड
बिहार के मोतीहारी में भारत-नेपाल सीमा पर वित्तीय अपराधों के खिलाफ एक बड़ी सफलता मिली है। मिलिट्री इंटेलिजेंस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की संयुक्त टीम ने सीमावर्ती इलाके में एक समन्वित कार्रवाई करते हुए जाली नोटों के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट से जुड़े एक कुख्यात तस्कर को गिरफ्तार कर लिया है।
पकड़े गए आरोपी की पहचान दया शंकर तिवारी उर्फ सुशील तिवारी के रूप में की गई है, जो महेंद्र तिवारी का पुत्र है। वह सीतामढ़ी जिले के मेजरगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत खैरवा का निवासी है। सीमावर्ती क्षेत्र की सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए यह गिरफ्तारी एक बड़ा कदम है, क्योंकि आरोपी हरैया थाना कांड संख्या 23/26 में पुलिस का मुख्य वांटेड अपराधी था।
भारत-नेपाल-बांग्लादेश नकली नोट नेटवर्क की जांच तेज
जांच एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार तस्कर जाली भारतीय नोट छापने और उन्हें बाजार में खपाने के एक बड़े नेटवर्क का संचालन कर रहा था। यह अवैध कारोबार भारत, नेपाल और बांग्लादेश तक फैला हुआ था, जिसके लिए उसने इन तीनों देशों के बीच एक व्यवस्थित वितरण नेटवर्क तैयार किया था।
भारत मंथन लाइव न्यूज (Bharat Manthan Live News) के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां और खुफिया विभाग लंबे समय से इस तस्कर की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे, क्योंकि वह लगातार संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय था। गिरफ्तारी के बाद विभिन्न जांच और खुफिया विंग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उससे गहन पूछताछ शुरू कर दी है, जिससे इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट से जुड़े कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
सीमा पार अपराधों से जुड़ा लंबा आपराधिक इतिहास आया सामने
सुरक्षा बलों की जांच में आरोपी दया शंकर तिवारी का एक लंबा और गंभीर आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। मोतीहारी में पकड़े जाने से पहले ही उसके खिलाफ मेजरगंज थाने में कई आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें मेजरगंज थाना कांड संख्या 85/23 और मेजरगंज थाना कांड संख्या 301/22 विशेष रूप से शामिल हैं।
इस रणनीतिक गिरफ्तारी के बाद, बिहार एसटीएफ ने सीमावर्ती क्षेत्रों में अपने खोजी अभियान को और तेज कर दिया है ताकि इस गिरोह से जुड़े अन्य तस्करों और स्थानीय सप्लायरों का पता लगाया जा सके। सीमा पर तैनात सभी सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है ताकि इस नेटवर्क के पूरे लॉजिस्टिक्स और रूट को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।
