आरा में असिस्टेंट प्रोफेसर बहाली की नई परीक्षा प्रणाली का विरोध

आरा में वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के पुराने परिसर में नई परीक्षा प्रणाली के खिलाफ बैठक करते शोधार्थी।

आरा में वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के पुराने परिसर में रविवार को शोधार्थियों, नेट एवं पीएचडी अभ्यर्थियों ने बैठक कर असिस्टेंट प्रोफेसर बहाली की नई परीक्षा आधारित चयन प्रणाली का कड़ा विरोध किया। उन्होंने वर्तमान भर्ती को पूर्व से प्रचलित एपीआई एवं अकादमिक स्कोर प्रणाली से ही संपन्न कराने की मांग की।

वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में शोधार्थियों और अभ्यर्थियों ने की बैठक

आरा स्थित वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के पुराने परिसर में रविवार को विभिन्न विभागों के शोधार्थियों, नेट (NET) एवं पीएचडी (Ph.D.) अभ्यर्थियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में बिहार सरकार द्वारा प्रस्तावित असिस्टेंट प्रोफेसर बहाली में परीक्षा आधारित नई चयन प्रक्रिया का पुरजोर विरोध किया गया। अभ्यर्थियों ने वर्तमान भर्ती को पूर्व से प्रचलित एपीआई (Academic Performance Indicator) एवं Academic Score आधारित चयन प्रक्रिया के अनुसार ही संपन्न कराने की मांग प्रमुखता से उठाई।

बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि भर्ती प्रक्रिया के बीच में चयन नियमों में बदलाव करना किसी भी दृष्टिकोण से न्यायसंगत नहीं है। उनका तर्क था कि बिहार के हजारों नेट एवं पीएचडी अभ्यर्थियों ने वर्षों तक API एवं Academic Score प्रणाली को ध्यान में रखकर शोध, शोध-पत्र प्रकाशन, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों में सहभागिता, अध्यापन अनुभव तथा अन्य शैक्षणिक उपलब्धियों के आधार पर अपनी प्रोफाइल तैयार की है। ऐसे में नई परीक्षा प्रणाली लागू करना उनके वर्षों के परिश्रम की अनदेखी होगी।

पीएचडी की अनिवार्यता और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर उठाया सवाल

वक्ताओं ने नियमों में बदलाव का विरोध करते हुए यह भी कहा कि नई नियमावली के तहत बिना Ph.D. पूर्ण किए अभ्यर्थियों की नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। जबकि सहायक प्राध्यापक का दायित्व केवल अध्यापन तक सीमित नहीं होता, बल्कि शोध कार्य, शोधार्थियों का मार्गदर्शन एवं उच्च शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को बढ़ावा देना भी उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

बैठक में रेखांकित किया गया कि UGC Act एवं UGC Regulations की मूल भावना विश्वविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, शोध एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देना है। इसलिए सहायक प्राध्यापकों के चयन में अभ्यर्थियों की शैक्षणिक एवं शोध उपलब्धियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

डोमिसाइल नीति लागू करने और आयु सीमा बढ़ाने की मांग

अभ्यर्थियों ने पुरजोर मांग की कि वर्तमान बहाली पुरानी API/Academic Score आधारित चयन प्रक्रिया से ही कराई जाए। इसके अतिरिक्त बैठक में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा को 40 वर्ष से बढ़ाकर 55 वर्ष करने तथा बिहार के मूल अभ्यर्थियों के हित में डोमिसाइल नीति लागू करने की भी मांग उठाई गई।

बैठक के अंत में All Ph.D. Holders & Research Scholars Association of Bihar के बैनर तले आगे की रणनीति तय की गई। इसके साथ ही राज्यपाल-सह-कुलाधिपति, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री एवं बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग को ज्ञापन भेजकर वर्तमान भर्ती प्रक्रिया को पुरानी API/Academic Score प्रणाली के अनुसार संचालित कराने का सर्वसम्मत निर्णय लिया गया।

इस बैठक में डॉ. संदीप ठाकुर, डॉ. चंदन तिवारी, छोटू सिंह, के. डी. यादव, आलोक रंजन, डॉ. अमिताभ कुमार, रंजन ओझा, ज्योति कुमार, भीम यादव, अमित सम्राट, कृष्णा तिवारी, सदानंद राय सहित विभिन्न विभागों के शोधार्थी, NET एवं Ph.D. अभ्यर्थी उपस्थित रहे। शिक्षा जगत से जुड़ी हर प्रामाणिक और आधिकारिक अपडेट के लिए भारत मंथन लाइव न्यूज (Bharat Manthan Live News) के साथ बने रहें।

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