रिम्स में जांच के लिए मरीजों को 8 दिन की वेटिंग, बढ़ी परेशानी

रांची के रिम्स अस्पताल परिसर में अपनी जांच की तारीख का इंतजार करते परेशान मरीज और उनके परिजन।

रांची स्थित रिम्स में सीटी स्कैन, इको और अल्ट्रासाउंड जैसी जरूरी जांचों के लिए मरीजों को 5 से 8 दिनों तक का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। झारखंड के इस सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में जांच सुविधाओं पर दबाव बढ़ने से मरीजों के इलाज में लगातार देरी हो रही है।

रिम्स में चरमराई जांच व्यवस्था: गंभीर टेस्ट के लिए मिल रही लंबी तारीखें

रांची: झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में इलाज कराने आ रहे मरीजों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, अस्पताल में जांच सुविधाओं पर दबाव इस कदर बढ़ गया है कि गंभीर मरीजों को भी सीटी स्कैन और इको (Echocardiography) जैसी जरूरी जांचों के लिए 8-8 दिनों की लंबी वेटिंग मिल रही है। आज अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को एक हफ्ते बाद की तारीख दी जा रही है, जिससे उनके सटीक इलाज में काफी देरी हो रही है।

रिम्स में न केवल रांची बल्कि पूरे झारखंड और आसपास के राज्यों से भी मरीज बड़ी उम्मीदें लेकर इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में जब डॉक्टरों द्वारा उन्हें टेस्ट लिखा जाता है, तो 8 दिन बाद का नंबर मिलने से उन्हें भारी निराशा हाथ लग रही है। आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोग इतनी लंबी अवधि तक इंतजार करने को मजबूर हैं, जबकि कुछ लोग मजबूरन निजी सेंटरों में चार गुना अधिक तक पैसे देकर जांच करा रहे हैं। इससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ-साथ मरीज को लाने-ले जाने में भी भारी परेशानी हो रही है।

ओपीडी और इमरजेंसी में मरीजों का भारी दबाव

अस्पताल प्रशासन पर मरीजों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, रिम्स की ओपीडी (OPD) में हर दिन औसतन 2,000 से अधिक मरीज परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही, रिम्स के इमरजेंसी वार्ड में प्रतिदिन 250 से ज्यादा गंभीर मरीज इलाज के लिए भर्ती किए जा रहे हैं। हर दिन पहुंचने वाले हजारों लोगों की इस भारी संख्या की वजह से अस्पताल के मौजूदा रिसोर्सेज और जांच मशीनों पर अत्यधिक बोझ पड़ रहा है। इस भारी दबाव के बावजूद प्रबंधन मरीजों को समय पर जांच उपलब्ध कराने में विफल साबित हो रहा है और न ही संसाधन बढ़ाए जा रहे हैं।

जांच में देरी से बढ़ रहा है गरीब मरीजों का दर्द

सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड और इको जैसी जांचें गंभीर बीमारियों का समय पर पता लगाने और सटीक इलाज शुरू करने के लिए डॉक्टरों के लिए बेहद जरूरी होती हैं। डॉक्टरों को इलाज की दिशा तय करने के लिए इन रिपोर्ट्स की तुरंत आवश्यकता होती है। लेकिन रिम्स की वर्तमान स्थिति यह है कि गंभीर स्थिति में पहुंचने वाले मरीज को भी सीटी स्कैन और इको के लिए 8 दिन बाद का समय दिया जा रहा है, वहीं अल्ट्रासाउंड के लिए भी 5 दिन तक की वेटिंग चल रही है।

इस अव्यवस्था के कारण दूर-दराज के गांवों से आने वाले गरीब मरीज इतने दिनों तक रांची में रुककर इंतजार करने को मजबूर हैं। जो मरीज आर्थिक रूप से सक्षम हैं, वे निजी सेंटरों में महंगी जांच कराने चले जाते हैं, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के पास इस कदर परेशान होने और लंबा इंतजार करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं बचा है।

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