रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) परिसर स्थित विश्राम सेवा सदन में किराया और सिक्योरिटी मनी घटाए जाने के बाद मरीजों के परिजनों की भीड़ काफी बढ़ गई है। नए नियमों के तहत अब मरीजों के परिजनों को बेहद किफायती दरों पर बेड और डोरमेट्री की सुविधा मिल रही है।
किराया और सुरक्षा राशि घटने के बाद विश्राम सेवा सदन में बढ़े लोग
रांची: रिम्स (RIMS) स्थित विश्राम सेवा सदन में रुकने के किराए और सिक्योरिटी मनी में भारी कटौती किए जाने के बाद से मरीजों के परिजनों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, रिम्स प्रबंधन ने बताया है कि पिछले महज एक सप्ताह के भीतर ही 1,800 से अधिक लोगों ने इस सस्ती आवास सुविधा का लाभ उठाया है। इसके विपरीत, पिछले वर्ष की बात करें तो यहां प्रतिदिन औसतन केवल 65 लोग ही ठहरते थे।
मात्र 25 रुपये प्रतिदिन के किराए पर मिल रहा बेड
रिम्स प्रबंधन द्वारा लागू की गई नई दरों के अनुसार, अब मरीज की वैध ओपीडी (OPD) या आईपीडी (IPD) पर्ची दिखाने पर शुरुआती सात दिनों तक मरीजों के परिजनों को मात्र 25 रुपये प्रति बेड प्रतिदिन की दर से रहने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, आठवें दिन से यह शुल्क बढ़कर 50 रुपये प्रतिदिन हो जाएगा।
इससे पहले इस सुविधा के लिए शुरुआती सात दिनों तक 100 रुपये प्रतिदिन और उसके बाद के दिनों के लिए 150 रुपये प्रतिदिन का शुल्क देना पड़ता था। इसके अतिरिक्त, प्रबंधन ने रिफंडेबल सिक्योरिटी मनी (सुरक्षा राशि) को भी 500 रुपये से सीधे घटाकर अब केवल 200 रुपये कर दिया है।
जागरूकता की कमी अब भी बड़ी चुनौती: डॉ. शिशिर
लगभग 5,034 वर्गमीटर के विस्तृत क्षेत्र में बने इस आधुनिक विश्राम सेवा सदन का निर्माण कार्य वर्ष 2019 में शुरू किया गया था, जिसके बाद जुलाई 2024 में इसका विधिवत उद्घाटन हुआ। अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, इस भवन से हर वर्ष लगभग 90 हजार लोगों को सीधे तौर पर लाभ मिल सकता है। हालांकि, इन रियायती दरों के लागू होने के बावजूद एक बड़ी संख्या ऐसे परिजनों की है जो इस सरकारी सुविधा से पूरी तरह अनजान हैं और जानकारी के अभाव में वे अस्पताल के बाहर निजी लॉज और होटलों में भारी किराया चुकाने को मजबूर हैं।
रिम्स के जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. शिशिर ने इस संबंध में बताया कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को राहत देने तथा उन्हें सस्ती आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ही किराए और सुरक्षा राशि में यह बड़ी कटौती की गई है। उन्होंने आगे कहा कि शुल्क घटने के बाद विश्राम सेवा सदन में ठहरने वालों की संख्या में वृद्धि तो हुई है, लेकिन जागरूकता की कमी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसके समाधान के लिए सूचना प्रसार को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा ताकि दूर-दराज से आने वाले अधिक से अधिक मरीजों के परिजन इस जनकल्याणकारी सुविधा का पूरा लाभ उठा सकें।
