बद्रीनाथ दान चोरी विवाद के बाद उत्तराखंड के अन्य मंदिरों ने बदले नियम

उत्तराखंड का पवित्र बद्रीनाथ धाम मंदिर जहां दान राशि में अनियमितता के बाद सुरक्षा और नियम कड़े किए गए हैं।

बद्रीनाथ धाम में दान राशि में अनियमितता और चोरी के आरोपों के बाद उत्तराखंड के प्रमुख मंदिरों ने अपनी दान प्रणालियों की सतर्कता बढ़ा दी है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) द्वारा आंतरिक जांच और कर्मचारी के निलंबन के बाद अब पुलिस इस संवेदनशील मामले की आपराधिक जांच कर रही है।

बद्रीनाथ मंदिर समिति ने आरोपी कर्मचारी को किया निलंबित, पुलिस जांच शुरू

देहरादून: देश भर के मंदिरों से तीर्थयात्रियों के दान की चोरी की खबरें सामने आने के बाद, उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में दान राशि में अनियमितता के आरोपों ने राज्यव्यापी बहस छेड़ दी है। इस घटना के बाद मंदिर दान प्रणालियों में पारदर्शिता और प्रशासनिक देखरेख को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सोशल मीडिया पर आरोप वायरल होने के बाद, बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने तुरंत संज्ञान लेते हुए एक उच्च स्तरीय आंतरिक जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच के दौरान कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने के बाद, अध्यक्ष कार्यालय में तैनात कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को निलंबित कर दिया गया है।

बीएनएस की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज, सीसीटीवी की जांच जारी

मंदिर के एक अधिकारी की लिखित शिकायत के आधार पर बद्रीनाथ थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। भारत मंथन Live News को मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में आपराधिक जांच तेज कर दी है। विभागीय जांच के साथ-साथ पुलिस टीम सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध सबूतों की जांच कर रही है ताकि धोखाधड़ी के पूरे विवरण का खुलासा किया जा सके।

गढ़वाल संभाग आयुक्त की अध्यक्षता में समिति का गठन

इस पूरे घटनाक्रम की गहनता से पड़ताल करने के लिए गढ़वाल संभाग आयुक्त (Garhwal Divisional Commissioner) की अध्यक्षता में एक अलग जांच समिति का भी गठन किया गया है। कर्मचारी के निलंबन और पुलिस में मुकदमा दर्ज होने से यह स्पष्ट हो गया है कि दान राशि के प्रबंधन में किसी न किसी स्तर पर अनियमितता अवश्य हुई है।

आस्था को बनाए रखने के लिए अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों ने भी बदले नियम

उत्तराखंड के चार धाम श्राइन भारत और विदेशों के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। इस ताजा विवाद के बाद उत्तराखंड के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों ने भी अपनी आंतरिक प्रणालियों की समीक्षा शुरू कर दी है, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास अटूट बना रहे। पूर्व में भी इन पवित्र स्थलों पर वीआईपी दर्शन, तीर्थयात्रा व्यवस्था, सोने से जुड़े विवाद और क्यूआर कोड (QR Code) को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद प्रशासन को स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा है।

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *