नई दिल्ली में केंद्र सरकार आगामी 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में ‘आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश करने की योजना बना रही है। यह विधेयक पिछले महीने विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) पर मिलने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ पर आयकर छूट देने के लिए लागू किए गए अध्यादेश का स्थान लेगा।
मानसून सत्र में पेश होगा नया आयकर संशोधन विधेयक
केंद्र सरकार संसद के आगामी मानसून सत्र में एक नया आयकर (संशोधन) विधेयक पेश करने की तैयारी में है। भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य पिछले महीने जारी किए गए उस अध्यादेश को कानूनी रूप से प्रतिस्थापित करना है, जिसके तहत विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में निवेश से होने वाली ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर आयकर से पूरी छूट दी गई थी। संसद का यह मानसून सत्र आगामी 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है।
यह अध्यादेश पिछले महीने पश्चिम एशिया संकट के कारण भारतीय रुपये पर बने दबाव को कम करने और देश में विदेशी पूंजी के प्रवाह को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू किया गया था। अब 20 जुलाई से शुरू होने वाले सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले नए विधेयकों की सूची में ‘आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026’ को भी शामिल किया गया है, जो ‘आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ का स्थान लेगा।
सरकारी प्रतिभूति बाजार को मजबूत करने का प्रयास
इस प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य भारत के संप्रभु ऋण बाजार (सॉवरेन डेट मार्केट) को अधिक सुदृढ़ बनाना, स्थिर वैश्विक पूंजी प्रवाह को आकर्षित करना और बाजार में नकदी (लिक्विडिटी) को बढ़ाना है। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की कीमतों में आए तेज उछाल और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में उत्पन्न व्यवधानों के कारण वर्तमान वृहद-आर्थिक माहौल में काफी अस्थिरता बनी हुई है, जिसे देखते हुए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारतीय रुपये के मूल्य में आ रही गिरावट को रोकने और विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार की तरफ आकर्षित करने के लिए सरकार ने यह कर छूट प्रदान की है। 5 जून को जारी राजपत्र अधिसूचना (गजट नोटिफिकेशन) के अनुसार, सरकार ने आयकर अधिनियम में संशोधन के लिए एक अध्यादेश जारी किया था, जिसके तहत 1 अप्रैल से सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री, विनिमय या हस्तांतरण से होने वाली ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर पूर्ण कर छूट का प्रावधान किया गया था।
कर नियमों की वर्तमान स्थिति और अध्यादेश का महत्व
मौजूदा कर व्यवस्था के अंतर्गत, विदेशी संस्थागत निवेशकों को 12 महीने से अधिक समय तक रखे गए सूचीबद्ध शेयरों और बॉन्डों पर मिलने वाले दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) पर 12.5 प्रतिशत का टैक्स देना होता है। इसके साथ ही, सरकारी बॉन्डों से अर्जित ब्याज आय पर विदेशी निवेशकों के लिए 20 प्रतिशत का विदहोल्डिंग टैक्स लागू है। नए संशोधनों के माध्यम से इसी कर भार को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा हस्ताक्षरित इस अध्यादेश में बैंक फार इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) को वर्ष 1930 में स्थापित और बेसल, स्विट्जरलैंड में मुख्यालय वाली अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था के रूप में परिभाषित किया गया है। इसके साथ ही इसमें भारतीय कानून के अंतर्गत विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) और सरकारी प्रतिभूतियों की मौजूदा वैधानिक परिभाषाओं का भी संदर्भ शामिल है।
राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, इस अध्यादेश को लागू करना अत्यंत आवश्यक हो गया था क्योंकि उस समय संसद का सत्र नहीं चल रहा था और तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता थी। इसी वजह से संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति की अध्यादेश बनाने की शक्तियों का उपयोग कर इसे लागू किया गया था।
