भिलाई नगर विधानसभा चुनाव विवाद में कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश में दखल से इनकार कर दिया। इसके बाद भाजपा नेता एवं पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय की निर्वाचन याचिका पर हाईकोर्ट में नियमित ट्रायल का रास्ता साफ हो गया है।
भिलाई नगर विधानसभा चुनाव मामले में सुप्रीम कोर्ट से देवेंद्र यादव की SLP खारिज
भिलाई नगर विधानसभा चुनाव से जुड़े विवाद में कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव को भारत के सर्वोच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने देवेंद्र यादव द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 30 जून 2026 के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया, जिसमें याचिका के कुछ मुद्दों को प्रारंभिक मुद्दे के रूप में तय करने की मांग खारिज कर दी गई थी। अब भाजपा नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय की निर्वाचन याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में नियमित ट्रायल चलेगा।
मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने सुनाया फैसला
इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने की। सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद भिलाई नगर सीट के चुनाव परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका में आगे की कानूनी कार्यवाही और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
जानिए क्या है भिलाई नगर विधानसभा चुनाव विवाद
यह पूरा मामला निर्वाचन याचिका क्रमांक 9/2024 से जुड़ा हुआ है। छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता प्रेम प्रकाश पांडेय ने 65-भिलाई नगर विधानसभा सीट से देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती दी है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि नामांकन के दौरान प्रस्तुत किए गए शपथ-पत्र में आवश्यक सांविधिक जानकारी का पूरा खुलासा नहीं किया गया था। इसके साथ ही लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के तहत भ्रष्ट आचरण से संबंधित आरोप भी लगाए गए हैं।
हाईकोर्ट के फैसले को दी गई थी चुनौती
विधायक देवेंद्र यादव ने हाईकोर्ट में सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के तहत आवेदन दाखिल कर निर्वाचन याचिका के मुद्दा संख्या 2 और 4 को प्रारंभिक मुद्दों के रूप में तय करने का अनुरोध किया था। 30 जून 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा था कि ये मुद्दे तथ्य और कानून से जुड़े मिश्रित प्रश्न हैं, जिनका निर्णय गवाही व साक्ष्य के आधार पर नियमित ट्रायल के दौरान ही संभव है।
हाईकोर्ट के इसी आदेश के खिलाफ देवेंद्र यादव ने सुप्रीम कोर्ट में SLP (Civil) No. 28778/2026 दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। भारत मंथन लाइव न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले भी देवेंद्र यादव द्वारा ऑर्डर VII नियम 11 CPC के तहत दायर आवेदन के खारिज होने पर सुप्रीम कोर्ट में SLP (Civil) No. 6306/2025 दाखिल की गई थी, जिसे शीर्ष अदालत ने 24 फरवरी 2026 को खारिज कर दिया था।
