छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान के लेखा मिलान में बड़ा अंतर सामने आया है। प्रदेश के 26 जिलों में कुल 68,491 टन धान की कमी दर्ज की गई है, जिसमें सबसे ज्यादा शॉर्टेज कांकेर जिले में मिला है। मामले को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
छत्तीसगढ़ धान खरीदी में गड़बड़ी: 26 जिलों में 68,491 टन धान का शॉर्टेज दर्ज
छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन के दौरान समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान के लेखा मिलान (अकाउंट रिकॉन्सिलिएशन) की प्रक्रिया के दौरान बड़ा अंतर सामने आया है। प्रदेश के 2,740 धान खरीदी केंद्रों में से अब तक 2,634 केंद्रों का लेखा मिलान पूरा हो चुका है।
इस प्रक्रिया में प्रदेश के 26 जिलों के केंद्रों में कुल 68,491 टन धान की कमी (शॉर्टेज) पाई गई है।
141 लाख मीट्रिक टन धान की हुई थी खरीदी
खाद्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, खरीफ सीजन में राज्यभर में लगभग 141 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई थी। इसके लिए प्रदेश में 2,740 धान खरीदी केंद्र स्थापित किए गए थे।
लेखा मिलान के दौरान सामने आई कमी को लेकर विभाग का कहना है कि यह अंतर धान में सूखत (नमी कम होना) या अन्य कारणों से हुई बर्बादी की वजह से भी हो सकता है।
संबंधित प्रभारियों और प्रबंधकों से होगी शॉर्टेज की भरपाई
नियमों के अनुसार, जिन प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में धान की कमी पाई गई है, वहां के धान खरीदी प्रभारियों और प्रबंधकों पर इसकी सीधी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
प्रभारियों को या तो कम पाई गई मात्रा के बराबर धान जमा करना होगा या फिर उसकी निर्धारित कीमत की भरपाई करनी होगी। ऐसा न करने पर संबंधित प्रभारियों के खिलाफ प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कांकेर में सबसे ज्यादा कमी, कांग्रेस ने उठाई जांच की मांग
ज़िलावार आंकड़ों में सबसे अधिक शॉर्टेज कांकेर ज़िले में दर्ज किया गया है, जहाँ 13,436 टन धान कम पाया गया है। इसके अलावा राजनांदगांव में 4,825 टन, बस्तर में 4,739 टन, गरियाबंद में 4,424 टन, बालोद में 4,248 टन, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 3,906 टन, कवर्धा में 3,838 टन और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 3,467 टन धान की कमी सामने आई है।
धान के हिसाब में आए इस बड़े अंतर पर कांग्रेस ने सवाल उठाते हुए पूरे मामले की व्यापक जांच कराने की मांग की है।
