पलामू: झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों के शिकार और तस्करी से जुड़े एक बड़े अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। इस कार्रवाई में कुल 61 तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके पास से करोड़ों रुपये मूल्य के वन्यजीव और उनके अवशेष बरामद किए गए हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस तस्करी रैकेट के तार कई प्रभावशाली और राजनीतिक रूप से रसूखदार लोगों से भी जुड़े हो सकते हैं।
18 नवंबर 2025 से 20 जनवरी 2026 के बीच वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो और पलामू टाइगर रिजर्व की संयुक्त टीम ने झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के विभिन्न इलाकों में लगातार छापेमारी की। इसी दौरान 61 आरोपियों को पकड़ा गया, जिनमें छत्तीसगढ़ के चार और बिहार के आठ आरोपी शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क की पहुंच नेपाल, बांग्लादेश, चीन और साउथ ईस्ट एशिया तक फैली हुई है।
छापेमारी में भारी मात्रा में वन्यजीव अवशेष बरामद
कार्रवाई के दौरान टीम ने तस्करों के पास से 60 किलो पैंगोलिन के शल्क, दो रेड सैंड बोआ (दोमुंहा सांप), दो किलो कोरल, दो हिरण, एक तेंदुए की खाल, 1200 ग्राम सांप का जहर, बाघ की हड्डी का पाउडर और मोर के पंख बरामद किए हैं।
इस अभियान में पलामू, लातेहार, गढ़वा, जमशेदपुर, रांची, गुमला, पालकोट, छत्तीसगढ़ के कुसमी, जसपुर, बलरामपुर, डीडीयूएस टाइगर रिजर्व और बिहार के दरभंगा व बांका की वन विभाग टीमों ने सहयोग किया।
कौन-कौन से बड़े तस्कर हुए गिरफ्तार
बिहार के औरंगाबाद निवासी मोहम्मद सिराज को सांप के जहर की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। वहीं बिहार के बक्सर निवासी जयराम सिंह, इंद्रजीत कुशवाहा, मधुबनी के अजय कुमार झा, मुजफ्फरपुर के धीरज कुमार श्रीवास्तव और मधुबनी के पंकज कुमार झा को भी पकड़ा गया है।
जांच में सामने आया है कि जयराम सिंह और अजय कुमार झा का बिहार में राजनीतिक रसूख है। इन पर तेंदुए और हिरण की खाल की तस्करी का आरोप है, जबकि अजय कुमार झा पर रेड सैंड बोआ की तस्करी और अवैध रूप से उन्हें पालतू जानवर के तौर पर रखने के भी आरोप हैं।
झारखंड के कई आरोपी भी गिरफ्तार
झारखंड के पालकोट से भूरण सिंह, पलामू के हरिहरगंज से राजू कुमार, मेदिनीनगर से गोपाल सिंह प्रसाद, रांची से मसूद आलम, लातेहार के चंदवा से मोहम्मद जमशेद और गारु से राजू उरांव को गिरफ्तार किया गया है।
राजू उरांव वर्ष 2007-08 में नक्सल संगठन छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हुआ था और बाद में एक प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में उभरा। जांच एजेंसियों का कहना है कि वह बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के तस्करों के बीच सबसे बड़ी कड़ी के रूप में काम करता था। वहीं मसूद आलम पर रेड सैंड बोआ की तस्करी में शामिल होने का आरोप है।
नेपाल-बांग्लादेश के रास्ते चीन और साउथ ईस्ट एशिया तक तस्करी
जांच में खुलासा हुआ है कि झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ से वन्यजीव और उनके अवशेष पहले नेपाल और बांग्लादेश भेजे जाते हैं, जिसके बाद इन्हें चीन और साउथ ईस्ट एशिया के अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचा जाता है। इस रैकेट में कई सफेदपोश लोगों की भूमिका भी सामने आई है, जिनके खिलाफ सबूत जुटाए जा रहे हैं।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग के अनुसार इस पूरे क्षेत्र में शिकार और तस्करी करवाई जा रही है, जिसमें चीन सबसे बड़ा केंद्र माना जा रहा है।
ग्रामीणों को लालच देकर कराया जा रहा शिकार
जांच में यह भी सामने आया है कि अंतरराष्ट्रीय रैकेट स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों को लालच देकर या बहला-फुसलाकर शिकार करवा रहा है। ग्रामीणों से वन्यजीव या उनके अवशेष बेहद कम कीमत पर खरीदे जाते हैं, जिन्हें बाद में बड़े तस्करों के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाखों-करोड़ों रुपये में बेचा जाता है।
पलामू टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक ने बताया कि पिछले दो महीनों से लगातार चल रही इस कार्रवाई में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। यह नेटवर्क छोटे स्तर से लेकर बड़े और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ है, जिसे पूरी तरह खत्म करने के लिए आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
