लखनऊ में CBSC जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी की जांच कर रही यूपी STF ने फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट और सॉल्वर गैंग का खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि 40 हजार रुपये में प्रमाण पत्र बनवाकर अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वर परीक्षा में बैठाए गए।
लखनऊ CBSC JSA भर्ती घोटाला: STF जांच में बड़े खुलासे
लखनऊ में CBSC बोर्ड द्वारा आयोजित जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट भर्ती परीक्षा में हुई गड़बड़ी की जांच कर रही यूपी STF ने बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि परीक्षा में सॉल्वर बैठाने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने का संगठित नेटवर्क सक्रिय था।
फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट का इस्तेमाल
जांच के मुताबिक, झांसी और ललितपुर के सीएमओ कार्यालयों से फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र तैयार कराए गए। इन प्रमाण पत्रों के आधार पर अभ्यर्थियों को परीक्षा में विशेष लाभ दिलाया गया।
इस मामले में झांसी सिविल अस्पताल के एक कर्मचारी की भूमिका भी सामने आई है। STF इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की जांच कर रही है।
40 हजार रुपये में बनते थे सर्टिफिकेट
जांच में यह भी पता चला कि फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र 40-40 हजार रुपये में तैयार किए जाते थे।
अभ्यर्थी राज किशोर के लिए 40 प्रतिशत लो विजन का प्रमाण पत्र ललितपुर सीएमओ कार्यालय से बनवाया गया था। वहीं राममिलन ने 40 प्रतिशत शारीरिक अक्षमता का प्रमाण पत्र झांसी से बनवाया। अभिषेक यादव के लिए भी इसी प्रकार का प्रमाण पत्र तैयार किया गया।
सॉल्वर गैंग का खुलासा
STF के अनुसार, इस पूरे मामले में अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वर बैठाकर परीक्षा पास कराने का काम किया जा रहा था। इस सिंडिकेट का संचालन बीसीए पास मनीष मिश्रा कर रहा था।
कई आरोपी गिरफ्तार
STF ने इस मामले में मनीष मिश्रा के साथ आकाश अग्रवाल, सौरभ सोनी को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा तीन अभ्यर्थी—राज किशोर, राममिलन और अभिषेक यादव—को भी हिरासत में लिया गया है।
तीन सॉल्वर नीरज झा, सत्यम कुमार और दीपक कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है। STF का कहना है कि मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
