नागपुर: दृष्टिबाधित तैराक ईश्वरी पाल्क स्ट्रेट पार करने को तैयार

नागपुर की दृष्टिबाधित तैराक ईश्वरी कमलेश पांडे 6 अप्रैल 2026 को श्रीलंका के तलाईमन्नार से भारत के धनुषकोडी तक 38 किमी लंबे पाल्क स्ट्रेट को तैरकर पार करने की तैयारी में हैं। यह अभियान सफल होने पर वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली दुनिया की पहली दृष्टिबाधित तैराक बनेंगी।

नागपुर की ईश्वरी पांडे का ऐतिहासिक तैराकी अभियान

नागपुर: दृष्टिबाधित तैराक ईश्वरी कमलेश पांडे 38 किलोमीटर लंबे पाल्क स्ट्रेट को तैरकर पार करने की तैयारी कर रही हैं। यह समुद्री मार्ग श्रीलंका के तलाईमन्नार से भारत के धनुषकोडी तक फैला हुआ है।

यदि वह इस अभियान को सफलतापूर्वक पूरा करती हैं, तो वह ऐसा करने वाली दुनिया की पहली दृष्टिबाधित तैराक बन जाएंगी।

6 अप्रैल को शुरू होगा 14 घंटे का सफर

ईश्वरी 6 अप्रैल को सुबह 2:00 बजे तलाईमन्नार से समुद्र में उतरेंगी और लगातार 14 घंटे तैरकर धनुषकोडी पहुंचने का लक्ष्य रखती हैं।

उनके कोच संजय बटवे ने बताया कि यदि मौसम अनुकूल रहा, तो वह तय समय से पहले भी यह दूरी पूरी कर सकती हैं।

कड़ी ट्रेनिंग और कठिन चुनौतियां

इस अभियान की तैयारी के लिए ईश्वरी पिछले छह महीनों से नागपुर के विभिन्न स्विमिंग पूलों में रोजाना 8 से 10 घंटे अभ्यास कर रही हैं।

तैराकी के दौरान उन्हें खराब मौसम, तेज धाराएं, ऊंची लहरें और समुद्री जीव जैसे डॉल्फिन, शार्क और जेलीफिश जैसी चुनौतियों का सामना करना होगा।

पहले भी कर चुकी हैं लंबी दूरी की तैराकी

इससे पहले, वर्ष 2024 में ईश्वरी ने एलीफेंटा से गेटवे ऑफ इंडिया तक 17 किलोमीटर की समुद्री दूरी सफलतापूर्वक तय की थी।

परिवार और समुदाय का मिला सहयोग

ईश्वरी ने बताया कि पाल्क स्ट्रेट पार करना उनका सपना है और पिछले 5 से 6 महीनों से वह इसे पूरा करने के लिए लगातार मेहनत कर रही हैं।

उनकी पारिवारिक आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है, लेकिन कोच संजय बटवे और अन्य लोगों के सहयोग से वह इस मुकाम तक पहुंची हैं।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

इस अभियान के लिए सभी आवश्यक अनुमति प्राप्त कर ली गई है। ईश्वरी के साथ उनके कोच और अनुभवी तैराकों की एक टीम ‘पेस स्विमर’ के रूप में मौजूद रहेगी।

सुरक्षा के लिए 6 से 7 नावों की व्यवस्था की गई है, साथ ही एक मेडिकल टीम भी पूरे समय साथ रहेगी।

पढ़ाई और खेल दोनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन

16 वर्षीय ईश्वरी ने 10वीं कक्षा में 84 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं।

वह हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी को अंबाझरी झील पर ध्वजारोहण भी करती हैं और राज्य व राष्ट्रीय स्तर की कई तैराकी प्रतियोगिताओं में जीत दर्ज कर चुकी हैं।

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