रांची के सिरमटोली सरना स्थल पर 21 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने सरहुल पर्व पर पारंपरिक पूजा-अर्चना की। पाहन द्वारा विधि-विधान से पूजा कराई गई और सरई फूल से आशीर्वाद दिया गया, जिसे प्रकृति और मानव के संबंध का प्रतीक माना जाता है।
रांची में सरहुल पूजा में शामिल हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
रांची के सिरमटोली स्थित सरना स्थल पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी धर्मपत्नी एवं विधायक कल्पना सोरेन के साथ सरहुल पर्व के अवसर पर पहुंचे। यहां उन्होंने पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार श्रद्धा और उत्साह के साथ पूजा-अर्चना की।
पारंपरिक रीति-रिवाज के तहत पाहन ने पूजा संपन्न कराई, जिसमें स्थानीय परंपराओं का पालन किया गया।
सरई फूल से दिया गया आशीर्वाद
इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कान में सरई (साल) का फूल खोंसकर उन्हें आशीर्वाद दिया गया। यह परंपरा प्रकृति और मानव के गहरे संबंध का प्रतीक मानी जाती है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर राज्यवासियों को सरहुल पर्व की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।
सरहुल पर्व को बताया प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक
कार्यक्रम में संबोधन देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सिरमटोली का यह स्थल ऐतिहासिक है और यहां उपस्थित सभी लोगों का उन्होंने स्वागत किया। उन्होंने सरहुल महोत्सव से जुड़े लोगों का आभार जताया, जो इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरहुल एक ऐसा पर्व है जो प्रकृति से जुड़ाव का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य की यात्रा प्रकृति से शुरू होती है और उसी में समाहित होती है।
पर्यावरण संरक्षण और संस्कृति का संदेश
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरहुल महोत्सव आदिवासी संस्कृति, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामुदायिक एकता का प्रतीक है। यह पर्व पर्यावरण संरक्षण और आपसी सौहार्द का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आदिवासी परंपराओं, संस्कृति और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है।
