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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों में वित्तीय उत्पादों की गलत बिक्री यानी मिस-सेलिंग पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम प्रस्तावित किए हैं। केंद्रीय बैंक ने ड्राफ्ट संशोधन निर्देश जारी कर कई अहम बदलाव सुझाए हैं।
थर्ड पार्टी इंसेंटिव पर रोक
RBI ने प्रस्ताव दिया है कि बैंक कर्मचारियों को बीमा, म्यूचुअल फंड या अन्य थर्ड पार्टी उत्पाद बेचने पर बाहरी कंपनियों से किसी भी तरह का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रोत्साहन (इंसेंटिव) नहीं मिलेगा।
इसका उद्देश्य ग्राहकों को गलत या अनावश्यक उत्पाद बेचने की प्रवृत्ति पर लगाम लगाना है।
‘डार्क पैटर्न’ पर भी सख्ती
केंद्रीय बैंक ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ‘डार्क पैटर्न’ के इस्तेमाल पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है।
डार्क पैटर्न ऐसे भ्रामक डिज़ाइन होते हैं, जिनसे ग्राहक अनजाने में कोई उत्पाद खरीद लेते हैं। RBI ने इसे उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन बताया है।
बंडलिंग पर स्पष्ट निर्देश
बैंक किसी अपने उत्पाद के साथ थर्ड पार्टी उत्पाद को अनिवार्य रूप से नहीं जोड़ सकते।
अगर किसी सेवा के साथ तीसरे पक्ष का उत्पाद जरूरी है, तो ग्राहक को उसे किसी अन्य सेवा प्रदाता से लेने की स्वतंत्रता होगी।
मिस-सेलिंग साबित होने पर पूरी रकम वापसी
अगर किसी मामले में मिस-सेलिंग साबित होती है, तो बैंक को ग्राहक को पूरी राशि वापस करनी होगी और नुकसान की भरपाई भी करनी होगी।
ग्राहक नियामक द्वारा तय समयसीमा में शिकायत कर सकते हैं। जहां समयसीमा तय नहीं है, वहां 30 दिनों के भीतर शिकायत दर्ज की जा सकती है।
फीडबैक और निगरानी अनिवार्य
- बिक्री के 30 दिनों के भीतर ग्राहक से फीडबैक लेना अनिवार्य
- अर्धवार्षिक रिपोर्ट के आधार पर नीतियों की समीक्षा
- लक्ष्य आधारित बिक्री योजनाएं ऐसी न हों जो जबरन बिक्री को बढ़ावा दें
डायरेक्ट सेलिंग एजेंट्स के लिए नियम
DSAs ग्राहकों से सामान्यतः सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे के बीच ही संपर्क कर सकेंगे।
इसके बाहर संपर्क के लिए ग्राहक की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।
RBI के ये प्रस्ताव बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं।
