सहरसा में जेडीयू नेता और पूर्व सांसद आनंद मोहन ने 28 मार्च को कहा कि पार्टी को अब कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष की जरूरत नहीं है, क्योंकि नीतीश कुमार संगठन संभालने में पूरी तरह सक्षम हैं।
सहरसा में जेडीयू पर आनंद मोहन का बड़ा बयान
सहरसा में मीडिया से बातचीत के दौरान जेडीयू नेता और पूर्व सांसद आनंद मोहन ने पार्टी संगठन को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जेडीयू में अब कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष की कोई आवश्यकता नहीं रह गई है।
आनंद मोहन ने स्पष्ट कहा कि नीतीश कुमार ही पार्टी के सर्वेसर्वा हैं और वे संगठन को संभालने में पूरी तरह सक्षम हैं।
नीतीश कुमार की भूमिका पर जोर
उन्होंने कहा कि जब तक नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री पद पर थे, तब तक कार्यकारी अध्यक्ष की जरूरत समझी जा सकती थी। लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं।
आनंद मोहन के अनुसार, नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य के रूप में दिल्ली जा रहे हैं और इस पद पर रहते हुए वे संगठन को पूरा समय दे सकते हैं। ऐसे में कार्यकारी अध्यक्ष की भूमिका अब अप्रासंगिक हो गई है।
समर्थकों तक संदेश पहुंचाने की बात
उन्होंने कहा कि जेडीयू समर्थकों और पिछड़ा तथा अतिपिछड़ा समाज के लोगों तक यह संदेश पहुंचाना जरूरी है कि नीतीश कुमार ही पार्टी के सर्वेसर्वा हैं।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पार्टी को मजबूत बनाए रखने के लिए यह स्पष्ट संदेश सभी तक पहुंचना चाहिए कि निर्णय लेने वाला नेतृत्व एक ही है।
बयान के बाद तेज हुई राजनीतिक चर्चा
आनंद मोहन के इस बयान के बाद जेडीयू के अंदर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
10 अप्रैल को राज्यसभा शपथ और सीएम पद पर चर्चा
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने वाले हैं। ऐसे में बिहार में मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलें जारी हैं।
इसी बीच आनंद मोहन ने निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की है। डिप्टी सीएम पद को लेकर चल रही चर्चाओं पर उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री का मतलब चुप मुख्यमंत्री होता है।
