भारतीय निर्वाचन आयोग ने झारखंड समेत देश के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अप्रैल 2026 से मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) शुरू करने का निर्देश दिया है। आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को इस अभियान की तैयारियां जल्द पूरी करने को कहा है।
इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगा SIR
इस अभियान के तहत झारखंड, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, लद्दाख, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, दिल्ली, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड शामिल हैं।
घर-घर जाकर होगा सत्यापन
निर्वाचन आयोग के निर्देश पर बीएलओ पहले से ही घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन कर रहे हैं। वर्ष 2003 की मतदाता सूची के आधार पर वर्तमान सूची की मैपिंग की जा रही है और परिवार के सदस्यों का विवरण जुटाकर फैमिली ट्री तैयार किया जा रहा है। जिन राज्यों में यह प्रक्रिया अभी बाकी है, वहां अप्रैल से अभियान शुरू होगा।
SIR का उद्देश्य क्या है
इस विशेष अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल हो। इसके तहत
- नए मतदाताओं का पंजीकरण किया जाएगा
- मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाएंगे
- गलतियों और त्रुटियों को सुधारा जाएगा
- दावे और आपत्तियां दर्ज करने का मौका दिया जाएगा
इसके बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
इन दस्तावेजों की होगी जरूरत
निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखें। आने वाले समय में दस्तावेज सत्यापन और नागरिकता से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
आधार कार्ड अकेले मान्य नहीं
झारखंड में SIR के लिए 13 प्रकार के दस्तावेज तय किए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है। हालांकि, इसे सहायक दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसे अकेले मान्य दस्तावेज नहीं माना जाएगा।
