रांची में 20 मार्च 2026 को कांग्रेस द्वारा पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को 3 वर्षों के लिए निष्कासित किए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी ने इस फैसले पर हेमंत सरकार पर सवाल उठाए, जबकि JMM ने कांग्रेस के निर्णय का समर्थन किया।
रांची में योगेंद्र साव निष्कासन पर बढ़ी सियासत
रांची में कांग्रेस द्वारा पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को पार्टी से 3 वर्षों के लिए निष्कासित किए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इस फैसले के बाद विभिन्न दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर उरांव ने पार्टी गाइडलाइन से हटकर बयान देने के आरोप में यह कार्रवाई की है।
बीजेपी ने उठाए सवाल
बीजेपी के पूर्व विधायक भानू प्रताप शाही ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि योगेंद्र साव पर तेजी से कार्रवाई की गई और पूछा कि क्या किसी अल्पसंख्यक नेता पर भी इतनी जल्दी कार्रवाई होती।
उन्होंने यह भी कहा कि योगेंद्र साव लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और उनका परिवार भी पार्टी के साथ सक्रिय रहा है।
अजय साह का सरकार पर हमला
बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए हेमंत सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर विकास से जुड़े मुद्दों और मनरेगा पर राजनीति करने का आरोप लगाया।
अजय साह ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व संकट से गुजर रही है और पार्टी को योगेंद्र साव के आरोपों की जांच करनी चाहिए।
JMM ने फैसले का किया समर्थन
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने कांग्रेस के इस निर्णय का समर्थन किया है। पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि मुख्यमंत्री पर अनुचित टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है और पार्टी अनुशासन बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था।
उन्होंने कहा कि यदि कोई असहमति थी तो उसे पार्टी के भीतर उठाया जाना चाहिए था।
निष्कासन की पृष्ठभूमि
प्रदेश कांग्रेस मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने 20 मार्च को जानकारी दी थी कि योगेंद्र साव को 3 वर्षों के लिए निष्कासित किया गया है। यह फैसला अनुशासन समिति की सिफारिश पर लिया गया।
बताया गया कि 19 मार्च 2026 को बड़कागांव में उनके अवैध निर्माण पर NTPC द्वारा कार्रवाई के बाद योगेंद्र साव ने मुख्यमंत्री के खिलाफ टिप्पणी की थी, जिसे निष्कासन का कारण माना जा रहा है।
