नई दिल्ली में घोषित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में मलयालम सिनेमा के दिग्गज ममूटी और बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन को संयुक्त रूप से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार दिया गया है। कार्तिक आर्यन ने फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ के लिए अपना पहला, जबकि ममूटी ने ‘भ्रमयुगम’ के लिए अपने करियर का चौथा राष्ट्रीय पुरस्कार जीता।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में बड़ा धमाका, ममूटी और कार्तिक आर्यन बने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता
भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों (72nd National Film Awards) की घोषणा शनिवार को हो गई है। इस बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का शीर्ष सम्मान संयुक्त रूप से मलयालम सिनेमा के 74 वर्षीय महानायक ममूटी और बॉलीवुड के 35 वर्षीय अभिनेता कार्तिक आर्यन को दिया गया है। जहां एक तरफ कार्तिक आर्यन ने अपने करियर का पहला राष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर इतिहास रचा है, वहीं ममूटी ने चौथी बार इस खिताब पर कब्जा जमाया है।
कार्तिक आर्यन को यह सर्वोच्च सम्मान निर्देशक कबीर खान की फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मिला है, जो उनके करियर का अब तक का सबसे बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर से ताल्लुक रखने वाले कार्तिक ने साल 2011 में फिल्म ‘प्यार का पंचनामा’ से अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की थी।
‘चंदू चैंपियन’ के लिए कार्तिक आर्यन को मिला पहला राष्ट्रीय पुरस्कार
अपने 15 साल के लंबे फिल्मी सफर में कार्तिक आर्यन को मुख्य रूप से रोमांटिक-कॉमेडी फिल्मों जैसे ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’, ‘लुका छुपी’ और ‘सत्यप्रेम की कथा’ के लिए जाना जाता रहा है। हालांकि, भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर के जीवन पर आधारित बायोपिक ‘चंदू चैंपियन’ के लिए उन्होंने अपनी छवि को पूरी तरह से बदल दिया। इस सैनिक और एथलीट की भूमिका को निभाने के लिए कार्तिक ने कड़ा शारीरिक बदलाव और प्रशिक्षण लिया, जिसे आलोचकों द्वारा उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ अभिनय आंका गया।
ममूटी ने रचा इतिहास, अमिताभ बच्चन के रिकॉर्ड की बराबरी की
दूसरी ओर, मलयालम सुपरस्टार ममूटी ने राहुल सदाशिवन द्वारा निर्देशित ब्लैक-एंड-व्हाइट मनोवैज्ञानिक हॉरर फिल्म ‘भ्रमयुगम’ में कोडुमोन पोट्टी के रहस्यमयी और डरावने किरदार से दर्शकों और समीक्षकों को स्तब्ध कर दिया। वाईएनओटी स्टूडियोज और नाइट शिफ्ट स्टूडियोज द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित इस फिल्म में उनके शानदार अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुना गया है।
यह जीत ममूटी के पांच दशकों से अधिक लंबे करियर और 400 से अधिक फिल्मों के सफर की विविधता को दर्शाती है। हाल ही में फिल्म ‘काथल: द कोर’ में एक मध्यम आयु वर्ग के व्यक्ति की संवेदनशील भूमिका निभाने के ठीक बाद ‘भ्रमयुगम’ के क्रूर किरदार में ढलकर उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया है। इस चौथी जीत के साथ ही ममूटी ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के इतिहास में सर्वाधिक बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जीतने के मामले में महानायक अमिताभ बच्चन के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। इससे पहले वे 1989 (मथिलुकल और ओरु वडक्कन वीरगाथा), 1993 (पोंथन मादा और विधेयन), और 1998 (डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर) में यह पुरस्कार जीत चुके हैं।
