गुजरात उच्च न्यायालय ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री संबंधी सीआईसी के निर्देश को रद्द करने और उन पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाने के आदेश को चुनौती दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डी एन राय की पीठ ने एकल न्यायाधीश के मार्च 2023 के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
पीएम मोदी डिग्री विवाद: अरविंद केजरीवाल को गुजरात हाईकोर्ट से बड़ा झटका
अहमदाबाद में गुजरात उच्च न्यायालय ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की अपील याचिका को खारिज कर दिया है। यह याचिका गुजरात विश्वविद्यालय द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री का ब्योरा देने से जुड़े केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के आदेश को रद्द करने और केजरीवाल पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाने के खिलाफ दायर की गई थी।
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ का फैसला
मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डी एन राय की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि एकल न्यायाधीश के फैसले में कोई त्रुटि नहीं है। अदालत ने फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की, “मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, याचिकाकर्ता की दलीलों के आधार पर आक्षेपित निर्णय में कोई त्रुटि नहीं पाई गई है। तदनुसार, अपील को बिना किसी अतिरिक्त लागत के खारिज किया जाता है।”
2016 से शुरू हुआ था पूरा विवाद
यह पूरा विवाद वर्ष 2016 में तब शुरू हुआ था जब केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने गुजरात विश्वविद्यालय को केजरीवाल को पीएम मोदी की डिग्री से संबंधित जानकारी देने का निर्देश दिया था। गुजरात विश्वविद्यालय ने सीआईसी के इस निर्देश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी और केजरीवाल को इस मामले में पक्षकार बनाया था।
एकल पीठ का मार्च 2023 का आदेश
मार्च 2023 में उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश ने सीआईसी के आदेश को रद्द कर दिया था। आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(e) और 8(1)(j) का हवाला देते हुए अदालत ने कहा था कि जब तक कोई बड़ा सार्वजनिक हित शामिल न हो, तब तक प्रधानमंत्री की शैक्षणिक डिग्री से संबंधित जानकारी का खुलासा करने की कोई बाध्यता नहीं है। इसके अलावा, आरटीआई प्रावधानों के अनुचित उपयोग का हवाला देते हुए केजरीवाल पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
केजरीवाल के वकील की दलीलें खारिज
अपील के दौरान केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने जुर्माने का विरोध किया था। उन्होंने तर्क दिया था कि केजरीवाल ने पीएम मोदी की डिग्री की मांग पर जोर नहीं दिया था और सीआईसी ने एक पत्र के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की थी। हालांकि, एकल पीठ के फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद दायर की गई इस अपील को भी खंडपीठ ने खारिज कर दिया।
