केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने ऑनलाइन एमिशन डेटा मानकों का पालन न करने वाले दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के 648 उद्योगों को तुरंत बंद कर सील करने के सख्त निर्देश दिए हैं। ऑनलाइन कंटीन्यूअस एफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) के तहत 85 प्रतिशत डेटा उपलब्धता अनिवार्य होने के बावजूद इन इकाइयों द्वारा नियमों की अनदेखी की गई।
CPCB ने दिए 648 उद्योगों को सील करने के निर्देश
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और अन्य उत्तरी राज्यों के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (SPCBs) को तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इसके तहत नियमों का पालन न करने वाले 648 उद्योगों को बंद कर सील किया जाएगा।
CPCB की जांच में सामने आया कि इन 648 उद्योगों ने ऑनलाइन एमिशन डेटा को 85 प्रतिशत तक उपलब्ध रखने के अनिवार्य नियम का पालन नहीं किया है। ऑनलाइन कंटीन्यूअस एफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) दिशानिर्देशों के मुताबिक, उद्योगों को निरंतर रूप से अपने डेटा को SPCB सर्वर पर प्रसारित करना आवश्यक होता है।
विभिन्न राज्यों में सील होने वाले उद्योगों की स्थिति
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उत्तरी भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच औद्योगिक उत्सर्जन एक बड़ा कारक है, जो कुल प्रदूषण में 20 प्रतिशत तक योगदान देता है। खराब वायु गुणवत्ता के चलते इस क्षेत्र में पहले से ही ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का चरण-I लागू है।
CPCB द्वारा दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को भेजे गए पत्र के अनुसार, इन राज्यों के कुल 2,291 उद्योगों ने नए OCEMS पोर्टल पर डेटा भेजना शुरू किया था। इनमें टैनरी, शुगर मिलें, थर्मल पावर प्लांट, अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाएं, खाद्य प्रसंस्करण, टेक्सटाइल और मेटल प्रोसेसिंग इकाइयां शामिल हैं।
न्यूनतम डेटा उपलब्धता के मानदंड को पूरा न करने वाले कुल 648 उद्योगों में से:
- दिल्ली में: 10 इकाइयां
- राजस्थान में: 80 इकाइयां
- हरियाणा में: 298 इकाइयां
- उत्तर प्रदेश में: 260 इकाइयां शामिल हैं।
बोर्ड की सख्त कार्रवाई और आगे की प्रक्रिया
CPCB ने DPCC और संबंधित SPCBs को गैर-अनुपालन करने वाली इकाइयों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने और उन्हें सील करने का निर्देश दिया है। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि संबंधित उद्योगों द्वारा सुधार के पर्याप्त कदम उठाए जाने और राज्य बोर्डों या DPCC की संतुष्टि के बाद ही सीलिंग के आदेशों को रद्द कर इकाइयों को डी-सील किया जा सकेगा।
इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए पर्यावरण कार्यकर्ता तनुजा चौहान ने औद्योगिक प्रदूषण फैलाने वालों की जवाबदेही तय करने का स्वागत किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि केवल औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई से राजधानी का आसमान साफ नहीं होगा, बल्कि परिवहन सेक्टर से होने वाले प्रदूषण पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी है।
