नई दिल्ली में 1 नवंबर 2026 से लागू होने वाले बीएस-4 (BS-IV) श्रेणी के वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध पर परिवहन विशेषज्ञ अनिल छिक्करा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यह फैसला वैज्ञानिक आधार से रहित है और इससे राष्ट्रीय राजधानी की पूरी आपूर्ति श्रृंखला तथा व्यापारिक गतिविधियां चरमरा जाएंगी।
दिल्ली में बीएस-4 वाहनों के प्रतिबंध पर परिवहन विशेषज्ञ की चेतावनी
परिवहन विशेषज्ञ अनिल छिक्करा ने दिल्ली सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के उस फैसले को खारिज कर दिया है, जिसके तहत 1 नवंबर 2026 से दिल्ली में बाहर से आने वाले बीएस-4 श्रेणी के वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि, दिल्ली के भीतर पंजीकृत बीएस-4 वाहन पहले की तरह चलते रहेंगे, लेकिन बाहर से आने वाले वाहनों पर यह रोक लागू होगी।
ईटीवी भारत के साथ एक विशेष बातचीत में, पूर्व डिप्टी कमिश्नर ने इस नीति को वैज्ञानिक आधार से रहित एक “काल्पनिक शॉर्टकट” करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह नीति प्रदूषण को कम करने में नाकाम साबित होगी और इससे आम जनता तथा व्यापारी वर्ग बुरी तरह प्रभावित होगा।
आपूर्ति श्रृंखला और अर्थव्यवस्था पर असर
अनिल छिक्करा के अनुसार, इस प्रतिबंध का दायरा बहुत बड़ा है, जिससे दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के लाखों वाहन मालिक प्रभावित होंगे। पिछले वर्षों में पंजीकृत बीएस-4 वाहनों के साथ-साथ एनसीआर और अन्य राज्यों से दिल्ली आने वाले लगभग 50 लाख वाणिज्यिक और निजी वाहन सीधे तौर पर इसकी चपेट में आएंगे।
उन्होंने कहा कि इस तरह के व्यापक प्रतिबंध से दिल्ली की पूरी आपूर्ति श्रृंखला के अस्थिर होने का खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा, इससे उन कामगारों, पेशेवरों और कारोबारियों की दैनिक आवाजाही भी बाधित होगी जो रोजगार और व्यापार के सिलसिले में एनसीआर और पड़ोसी राज्यों से दिल्ली आते हैं।
प्रयोगशाला बनाम जमीनी वास्तविकता
सरकारी नीति के पीछे के तर्क पर सवाल उठाते हुए छिक्करा ने कहा कि प्रयोगशाला आधारित मास-एमिशन टेस्ट के आधार पर निर्णय लिया जा रहा है, जहां अत्यधिक भार और उच्च गति जैसी चरम स्थितियों में इंजनों का मूल्यांकन किया जाता है। चूंकि दिल्ली एक मैदानी इलाका है जहां भारी ट्रैफिक और गति सीमा के कारण वाहन कम गति और कम भार पर चलते हैं, इसलिए आधुनिक स्वच्छ ईंधन का उपयोग करने वाले बीएस-4 वाहनों का वास्तविक उत्सर्जन बीएस-6 वाहनों के लगभग बराबर ही होता है।
कानूनी पहलुओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि हालांकि पुराने वाहनों की उम्र से जुड़े नियम एनजीटी (NGT) और सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों पर आधारित हैं, लेकिन समय के साथ अदालत ने नागरिकों पर पड़ने वाले आर्थिक और सामाजिक प्रभावों को देखते हुए रुख में बदलाव किया है और अधिकारियों को पुरानी गाड़ियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई न करने के निर्देश दिए हैं।
