नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने 4 मई 2026 से इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसिप्ट्स (EGRs) को लॉन्च कर दिया है। इसके जरिए निवेशक अब डिजिटल रूप में सोने की ट्रेडिंग कर सकेंगे और बाजार में अभूतपूर्व पारदर्शिता आएगी।
भारत में सोने के बाजार को आधुनिक बनाने की पहल
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने सोमवार (4 मई 2026) को इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसिप्ट्स (EGRs) लॉन्च कर दिया है। इसके साथ ही एक्सचेंज ने बुलियन सेगमेंट में आधिकारिक रूप से कदम रख दिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सोने की ट्रेडिंग को विनियमित करना और इसे वित्तीय प्रणाली का एक अभिन्न अंग बनाना है।
यह नई सुविधा 4 मई 2026 से शुरू हो गई है। इसके जरिए निवेशक डिमटेरियलाइज्ड (इलेक्ट्रॉनिक) रूप में सोने का व्यापार कर सकेंगे। यह सोना SEBI से मान्यता प्राप्त (एक्रिटेड) वॉल्ट में सुरक्षित रखा जाता है। इससे कीमतों के अंतर को कम करने में मदद मिलेगी और इस क्षेत्र में पारदर्शिता आएगी।
क्या हैं इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसिप्ट्स (EGRs)?
EGRs ऐसी डिमटेरियलाइज्ड सिक्योरिटीज हैं, जो भौतिक (फिजिकल) सोने के स्वामित्व का प्रतिनिधित्व करती हैं। यह सोना SEBI-मान्यता प्राप्त वॉल्ट में जमा होता है और इसे डिपॉजिटरी के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखा जाता है। प्रत्येक EGR पूरी तरह से फिजिकल गोल्ड से समर्थित होती है और इसे एक्सचेंज पर ट्रेड किया जा सकता है।
NSE के अनुसार:
“इस लॉन्च के साथ, NSE का लक्ष्य सोने की ट्रेडिंग के लिए एक मजबूत और पारदर्शी इकोसिस्टम तैयार करना है। इससे कुशल मूल्य खोज (प्राइस डिस्कवरी), बेहतर बाजार भागीदारी और निवेशकों के बीच विश्वास बढ़ेगा।”
NSE का सफल प्रदर्शन
इस लॉन्च के दौरान, NSE ने 1000-ग्राम सोने के बार को इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसिप्ट में बदलने (डिमटेरियलाइजेशन) का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया। यह भौतिक सोने को एक सुरक्षित और व्यापार योग्य डिजिटल साधन में बदलने की प्रणाली की क्षमता को दर्शाता है।
NSE के मुख्य व्यवसाय विकास अधिकारी (CBDO) श्रीराम कृष्णन ने कहा:
“NSE में इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसिप्ट्स की शुरुआत भारत के अपने सबसे पसंदीदा एसेट (सोने) के साथ इंटरैक्ट करने के तरीके में एक महत्वपूर्ण विकास को चिह्नित करती है। हम एक डिजिटल रास्ता बनाकर सोने को एक आधुनिक एसेट क्लास के रूप में स्थापित कर रहे हैं।”
एक्सचेंज ने बताया कि EGRs के माध्यम से निवेशक सुनिश्चित गुणवत्ता वाले सोने को इलेक्ट्रॉनिक रूप में रख सकेंगे। इसमें भौतिक और डिजिटल स्वरूप के बीच आसानी से रूपांतरण (कन्वर्शन) किया जा सकता है। निवेशक कम मात्रा में भी निवेश कर सकते हैं, जिससे बाजार में तरलता (लिक्विडिटी) और लचीलापन बढ़ेगा।
