अफगानिस्तान के शीर्ष व्यापारिक निकाय ने व्यापार प्रक्रियाओं को आसान बनाने, प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने और बिजनेस वीजा जारी करने की सुविधा प्रदान करने की आवश्यकता पर बल देते हुए भारत के साथ व्यापार और निवेश संबंधों के विस्तार का आह्वान किया है।
काबुल में अफगान चैंबर और भारतीय राजदूत के बीच रणनीतिक वार्ता
अफगानिस्तान और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापारिक व आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए राजनयिक स्तर पर प्रयास तेज हो गए हैं। काबुल में अफगानिस्तान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इन्वेस्टमेंट (ACCI) के अध्यक्ष सैयद करीम हाशमी और अफगानिस्तान में भारत के राजदूत यतिन पटेल के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। व्यापारिक निकाय द्वारा शनिवार को जारी किए गए एक आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच यह बातचीत “एक रणनीतिक और राजनयिक संवाद के ढांचे के भीतर” संपन्न हुई। बैठक के दौरान अफगान पक्ष ने भारत के साथ व्यापारिक पहुंच को अधिक सुलभ बनाने का प्रस्ताव रखा।
पाकिस्तान से व्यापार घटने के बीच ईरान का चबाहार पोर्ट बना सहारा
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ अफगानिस्तान के पारगमन व्यापार (ट्रंजिट ट्रेड) में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2021 (FY21) में जो व्यापार लगभग 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, वह वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) में घटकर महज 367 मिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया है। इस गिरावट के बीच काबुल ने ईरान के रास्ते सहित अन्य वैकल्पिक व्यापार मार्गों का रुख किया है। भारत भी ईरान के चबाहार बंदरगाह के माध्यम से अफगानिस्तान के साथ कनेक्टिविटी को लगातार मजबूत कर रहा है। चबाहार पोर्ट पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए इस भू-आबद्ध (लैंडलॉक्ड) देश तक सीधी पहुंच प्रदान करता है, क्योंकि पाकिस्तान भारतीय सामानों को अफगानिस्तान तक जमीनी मार्ग से ले जाने की अनुमति नहीं देता है।
द्विपक्षीय व्यापार और दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग पर जोर
भारत और अफगानिस्तान के बीच वित्तीय वर्ष 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार 907.85 मिलियन अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया था। भारत ने काबुल के साथ अपनी भागीदारी को निरंतर बढ़ाया है, जिसके तहत इस महीने की शुरुआत में अफगान कृषि मंत्री मौलवी अताउल्लाह ओमारी ने नई दिल्ली का दौरा भी किया था। भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, एसीसीआई (ACCI) के बयान में हाशमी ने भारत के साथ दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दोहराया। इसके साथ ही उन्होंने निजी क्षेत्र में व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाने और संस्थागत विकास की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर विशेष प्रकाश डाला।
