‘इंडिया’ गठबंधन मानसून सत्र में राम मंदिर और नीट पेपर लीक का मुद्दा उठाएगा

संसद के मानसून सत्र से पहले मीडिया को संबोधित करते राजद सांसद सुधाकर सिंह।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने रविवार को घोषणा की है कि ‘इंडिया’ गठबंधन आगामी संसद के मानसून सत्र में राम मंदिर चढ़ावा मामले और नीट पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरेगा। इसके साथ ही विपक्ष को विभाजित करने की कथित कोशिशों का भी संसद में कड़ा विरोध किया जाएगा।

मानसून सत्र में केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी में विपक्ष

नयी दिल्ली: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने रविवार को विपक्ष के आगामी राजनीतिक एजेंडे को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन आगामी संसद के मानसून सत्र में राम मंदिर चढ़ावा मामले और नीट (NEET) पेपर लीक जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरेगा। भारत मंथन Live News को मिली जानकारी के अनुसार, संसद का यह मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलना निर्धारित है।

बिहार के बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह ने एक साक्षात्कार में आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी संख्या बल हासिल करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि इसके लिए विपक्षी दलों को कमजोर करने की राजनीतिक रणनीति अपनाई जा रही है।

कई अहम मुद्दों पर एकजुट होकर लड़ेगा ‘इंडिया’ गठबंधन

राजद नेता ने दावा किया कि भाजपा देश भर में विपक्षी दलों में विभाजन पैदा करके दो-तिहाई बहुमत हासिल करने का प्रयास कर रही है, जिसका ‘इंडिया’ गठबंधन एकजुट होकर पुरजोर विरोध करेगा। उन्होंने कहा, “हम हर अहम मुद्दे को उठाएंगे जिसमें राम मंदिर चढ़ावा चोरी और पेपर लीक से लेकर बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) तक शामिल है।”

विपक्षी सांसदों के हालिया पाला बदलने और भविष्य में भी ऐसी किसी भी राजनीतिक अटकलबाजी के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने स्पष्ट किया कि यह चिंता केवल किसी एक दल की नहीं, बल्कि पूरे ‘इंडिया’ गठबंधन की है।

संविधान को कमजोर करने का लगाया आरोप

सुधाकर सिंह ने दल-बदल को लेकर सत्ताधारी दल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, “पहले, पाला बदलना कानून के दायरे में होता था। आज ऐसा लगता है कि उन सुरक्षा उपायों को भी नजरअंदाज किया जा रहा है।”

सांसद ने आगे कहा कि हर विपक्षी दल इस स्थिति को लेकर चिंतित है, क्योंकि सत्ताधारी पार्टी के पास अपने दम पर जरूरी संख्या बल नहीं है। इसके बावजूद अपने प्रतिद्वंद्वियों को कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष को कमजोर करने की भाजपा की ये कोशिशें दरअसल देश के संविधान को कमजोर करने की एक बड़ी राजनीतिक कोशिश का हिस्सा हैं।

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