पश्चिम एशिया में तनाव: हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान में भारी गोलाबारी

हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी हवाई हमलों के बाद बढ़ते सैन्य तनाव के बीच तैनात ईरानी सुरक्षा बल।

पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है और युद्धविराम की सभी बातचीत समाप्त हो गई है। ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य में एक मालवाहक जहाज पर किए गए हमले के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के 140 ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए हैं, जिसके बाद ईरान ने भी खाड़ी देशों पर जवाबी हमले किए हैं।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले के बाद अमेरिका की बड़ी सैन्य कार्रवाई

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष बेहद गंभीर मोड़ पर आ गया है, जहां दोनों पक्षों के बीच जारी भारी गोलाबारी के कारण युद्धविराम की संभावनाएं पूरी तरह मटियामेट हो गई हैं। भारत मंथन लाइव न्यूज को मिली जानकारी के अनुसार, ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक कंटेनर जहाज पर किए गए हमले के बाद रविवार तड़के अमेरिकी सेना ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। ईरान के हमले के कारण उस मालवाहक जहाज में आग लग गई थी और चालक दल को जहाज छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था।

अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र के कई देशों को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की है। इन हमलों की जद में बहरीन, कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ओमान और जॉर्डन शामिल हैं। युद्ध में लंबे समय से मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे कतर ने अपने क्षेत्र और पड़ोसी अरब देशों पर हुए इन हमलों को एक ‘खतरनाक तनाव’ करार दिया है।

परमाणु बमों से भी अधिक महत्वपूर्ण है हॉर्मुज जलडमरूमध्य: ईरान

ईरान के सर्वोच्च नेता के एक सलाहकार मोहसेन रजाई ने रविवार को एक बयान में कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक मार्ग ईरान के लिए “दर्जनों परमाणु बमों” से भी अधिक महत्वपूर्ण है और इस्लामी गणराज्य ईरान इस महत्वपूर्ण जलमार्ग की रक्षा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पश्चिमी देश लगातार ईरान पर परमाणु बम बनाने का आरोप लगाते रहे हैं, जबकि तेहरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और नागरिक उद्देश्यों के लिए है। तेल और प्राकृतिक गैस के परिवहन का मुख्य जरिया होने के कारण यह जलडमरूमध्य दोनों देशों के बीच वार्ता में सबसे बड़ा गतिरोध बना हुआ है।

अमेरिका ने ईरान के 140 ठिकानों को बनाया निशाना

अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि रविवार को किए गए हमलों में ईरान के लगभग 140 ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इन हमलों में मिसाइल और ड्रोन लॉन्चिंग साइट्स, गोला-बारूद के डिपो, संचार उपकरण और अन्य रणनीतिक केंद्रों को नष्ट किया गया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि हाल के दिनों के मुकाबले यह हमला काफी भारी था, जिसका उद्देश्य नागरिक जहाजों को निशाना बनाने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना है।

अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर लिखा, “ईरान ने एक गलत विकल्प चुना और अब वे इसकी कीमत चुका रहे हैं।” दूसरी ओर, ईरान की संसद के अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बगेर गालिबाफ ने कहा कि एकतरफा समझौतों का दौर अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि अपने वादे पर टिके रहो या कीमत चुकाने के लिए तैयार रहो।

ईरान और अमेरिका के बीच 17 जून को 60 दिनों के लिए एक अंतरिम युद्धविराम पर सहमति बनी थी ताकि स्थायी शांति का रास्ता निकाला जा सके, लेकिन पिछले 48 घंटों में दोनों ओर से की गई सैकड़ों एयरस्ट्राइक के कारण यह समझौता पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। अमेरिका पिछले एक सप्ताह में ईरान पर तीन दौर के हवाई हमले कर चुका है।

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