रांची के सदर अस्पताल में डॉक्टरों ने धनबाद के एक गंभीर मरीज की अत्यंत जटिल ‘थोरैसिक डिकॉर्टिकेशन’ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर इतिहास रच दिया है। निजी अस्पतालों द्वारा मना किए जाने के बाद डॉक्टरों ने क्रॉनिक एम्पायमा से पीड़ित इस मरीज का पूरी तरह मुफ्त इलाज कर सरकारी स्वास्थ्य सेवा की मिसाल पेश की।
प्राइवेट अस्पतालों से निराश मरीज को मिला नया जीवन
झारखंड की राजधानी रांची स्थित सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक नया मुकाम हासिल किया है। डॉक्टरों की एक टीम ने धनबाद से आए एक अत्यंत गंभीर मरीज की जटिल ‘थोरैसिक डिकॉर्टिकेशन’ सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया है। Bharat Manthan Live News की रिपोर्ट के अनुसार, मरीज लंबे समय से क्रॉनिक एम्पायमा नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित था, जिसके कारण उसके सीने में गाढ़ा मवाद और थक्के जम गए थे और उसका सांस लेना दूभर हो गया था।
मरीज को दिल से जुड़ी बीमारियां (कार्डियक कोमोरबिडिटीज) भी थीं। इस हाई-रिस्क प्रोफाइल को देखते हुए रांची के कई बड़े प्राइवेट अस्पतालों ने इस ऑपरेशन को करने से हाथ खड़े कर दिए थे। इसके अलावा, बड़े शहरों के निजी अस्पतालों में इस विशिष्ट ऑपरेशन का खर्च 6 से 8 लाख रुपए तक आता है, जिसे सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने पूरी तरह ‘मुफ्त’ संपन्न किया है।
जटिल प्रक्रिया के साथ की गई जांच
मरीज की गंभीर और जोखिम भरी स्थिति को देखते हुए सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने तुरंत ‘डिकॉर्टिकेशन सर्जरी’ करने का निर्णय लिया। ऑपरेशन थियेटर में प्रक्रिया के दौरान ही मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार दर्ज किया गया। डॉक्टरों ने इस बेहद जटिल शल्य चिकित्सा के साथ-साथ मरीज की डायग्नोस्टिक थोराकोस्कोपी और ब्रोंकोस्कोपी भी की।
डॉक्टरों की टीम ने पेश की मिसाल
इस पूरी हाई-रिस्क सर्जरी को डॉक्टरों की एक विशेषज्ञ टीम ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह ऑपरेशन ओंकोसर्जन डॉ. अभिनव के नेतृत्व में संपन्न हुआ। इस विशेषज्ञ टीम में निम्नलिखित चिकित्सक शामिल रहे:
- डॉ. अखिलेश
- डॉ. सौविक
- डॉ. दीपक
- डॉ. आंचल
- डॉ. विकास
इस पूरी जटिल शल्य चिकित्सा प्रक्रिया को अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रभात के कुशल मार्गदर्शन में पूरा किया गया, जिसने राज्य की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को एक नए शिखर पर पहुंचा दिया है।
