बोकारो: हत्या के दोषी देवशरण महतो को आजीवन कारावास, ₹25 हजार जुर्माना

तेनुघाट व्यवहार न्यायालय में हत्या मामले में दोषी को आजीवन कारावास की सजा।

मिथलेश कुमार : बोकारो जिले के तेनुघाट व्यवहार न्यायालय ने पेटरवार थाना क्षेत्र के ओरदाना निवासी देवशरण महतो को हत्या के मामले में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। फैसला जिला जज प्रथम फहीम किरमानी की अदालत ने सुनाया।

बोकारो के तेनुघाट न्यायालय ने हत्या के मामले में सुनाई आजीवन कारावास की सजा

बोकारो जिले के तेनुघाट व्यवहार न्यायालय के जिला जज प्रथम फहीम किरमानी की अदालत ने पेटरवार थाना क्षेत्र के ओरदाना निवासी देवशरण महतो को हत्या के मामले में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

सजा सुनाए जाने के बाद अभियुक्त को तेनुघाट जेल भेज दिया गया।

5 जून 2023 की घटना से जुड़ा है मामला

मामले के अनुसार, पेटरवार थाना क्षेत्र के ओरदाना निवासी नीरज कुमार महतो ने पेटरवार थाना में दर्ज कराए गए बयान में कहा था कि 5 जून 2023 की रात उनके पिता उपेंद्र महतो घर की छत पर सो रहे थे और वह स्वयं भी वहीं सोया हुआ था।

रात करीब 12 बजे तेज आवाज सुनकर जब वह जागे तो देखा कि देवशरण महतो हाथ में धारदार हथियार लेकर उनके पिता पर हमला कर चुका था। हमले में उनके पिता की बाईं कनपटी से काफी खून बह रहा था।

सूचक के अनुसार, जब उन्होंने आरोपी को पकड़ने का प्रयास किया तो वह मौके से फरार हो गया। इसके बाद जब वह अपने पिता के पास पहुंचे तो उनकी मृत्यु हो चुकी थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी पहले भी उनके पिता को जान से मारने की धमकी देता था।

पेटरवार थाना में दर्ज हुआ था मामला

सूचक के बयान के आधार पर पेटरवार थाना कांड संख्या 79/2023 दर्ज किया गया। जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया और मामला सत्रवाद संख्या 422/2023 के रूप में जिला जज प्रथम फहीम किरमानी की अदालत में स्थानांतरित हुआ।

गवाहों और बहस के बाद अदालत ने सुनाया फैसला

न्यायालय ने उपलब्ध गवाहों के बयान और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद देवशरण महतो को हत्या के आरोप में दोषी पाया।

अदालत ने अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाने के साथ 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। सजा सुनाए जाने के बाद उसे तेनुघाट जेल भेज दिया गया।

अभियोजन पक्ष ने रखी दलील

मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक सर्वेश आनंद सिंह ने बहस की। उनके साथ सूचक की ओर से अधिवक्ता चेतना नंद प्रसाद ने भी अदालत में पक्ष रखा।

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