CAG रिपोर्ट: झारखंड का राजस्व घाटा शून्य, पर बढ़ा कर्ज और सब्सिडी का बोझ

झारखंड विधानसभा में वित्त मंत्री द्वारा पेश कैग रिपोर्ट और राज्य के वित्तीय प्रबंधन का दृश्य

झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में निर्धारित समय-सीमा से पहले ही अपने राजस्व घाटे को शून्य कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मंगलवार को विधानसभा के पटल पर रखी गई कैग (CAG) रिपोर्ट के अनुसार जहां एक ओर वित्तीय स्थिति सुधरी है, वहीं दूसरी ओर राज्य पर कुल कर्ज और सब्सिडी का बोझ लगातार बढ़ा है।

कैग रिपोर्ट में झारखंड की वित्तीय स्थिति का खुलासा

झारखंड सरकार ने अपने वित्तीय प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए एफआरबीएम (FRBM) अधिनियम के तहत तय समय से पहले ही अपने राजस्व घाटे को समाप्त कर लिया है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा विधानसभा के पटल पर पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020-21 को छोड़कर पिछले पांच वर्षों में राज्य का राजस्व अधिशेष (Revenue Surplus) दर्ज किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों के अनुपात में प्रतिबद्ध व्यय में कमी आई है। वर्ष 2020-21 में यह 45 प्रतिशत था, जो घटकर 2024-25 में 34 प्रतिशत रह गया है।

कर्ज और सब्सिडी के बोझ में लगातार बढ़ोतरी

राजस्व घाटा शून्य होने के बावजूद राज्य पर कुल देनदारियों और सब्सिडी का बोझ बढ़ा है। वर्ष 2024-25 में राजस्व प्राप्तियों का 8.35 प्रतिशत हिस्सा सब्सिडी मद में गया।

इसके साथ ही राज्य की कुल देनदारी (कर्ज) 2023-24 के 1,23,435 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 1,29,744 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, 2024-25 में राज्य की राजस्व उत्प्लावकता में भी गिरावट दर्ज की गई है।

बजट प्रबंधन पर कैग ने उठाये गंभीर सवाल

कैग की रिपोर्ट में बजट प्रबंधन और खर्च की प्रक्रिया पर कई खामियों की ओर इशारा किया गया है। वित्त वर्ष 2024-25 के कुल 1,50,938.84 करोड़ रुपये के बजट में से 31,110 करोड़ रुपये (यानी 20.61% राशि) खर्च ही नहीं हो सकी।

मूल बजट प्रावधानों के पूरी तरह खर्च न होने के बावजूद 5,407 करोड़ रुपये के अनुपूरक प्रावधान किए गए। रिपोर्ट में 10 अनुदानों के तहत 19,648.71 करोड़ रुपये की बचत, पुराने लंबित बिलों के भुगतान और व्यय के गलत वर्गीकरण जैसी अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है।

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *