ऑपरेशन सिंदूर और वाघा-अटारी बॉर्डर बंद होने के कारण भारत-पाकिस्तान के बीच रिश्ते प्रभावित होने के बाद, मस्कट के रास्ते एक पाकिस्तानी दुल्हन शादी के लिए रायपुर पहुंची। गृह मंत्रालय की विशेष अनुमति से दुल्हनों को मस्कट, कोलंबो, ढाका और दुबई के रास्ते भारत आने की मंजूरी मिली, जिससे तय शादियां संपन्न हो सकीं।
ऑपरेशन सिंदूर और सीमा बंद होने से बढ़ा इंतजार
भारत और पाकिस्तान के बीच जमीनी सीमाएं बंद होने के कारण दोनों देशों के बीच तय हुए कई रिश्ते अधर में लटक गए थे। वाघा-अटारी बॉर्डर बंद होने की वजह से सामान्य वीजा धारकों की आवाजाही ठप हो गई थी।
ऐसे समय में भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने विशेष छूट प्रदान की। इसके बाद मस्कट, कोलंबो, ढाका, दुबई और कतर के रास्ते कनेक्टिंग फ्लाइट्स लेकर करीब 150 पाकिस्तानी दुल्हनें अपने परिजनों के साथ भारत पहुंचीं।
रायपुर बना सीमापार विवाह का साक्षी
विदेशों के वैकल्पिक हवाई मार्गों से भारत पहुंचने वाली दुल्हनों के लिए रायपुर भी एक प्रमुख केंद्र बना। रायपुर पहुंचकर पाकिस्तानी दुल्हन ने अपने भारतीय जीवनसाथी के साथ विवाह की रस्में पूरी कीं।
रायपुर के अलावा नागपुर, जोधपुर, अहमदाबाद, पुणे और भोपाल जैसे शहरों में भी ये शादियां संपन्न हुईं। गृह मंत्रालय द्वारा तय समयसीमा और कड़े वीजा नियमों के कारण अधिकतर शादियां सादगी और सीमित मेहमानों के साथ आयोजित की गईं।
दुल्हनों के साथ दूल्हा भी पहुंचा भारत
सीमा पर तनाव के बावजूद लंबे इंतजार के बाद इन रिश्तों को मंजिल मिली। कुछ मामलों में वीजा पाबंदियों के कारण दुल्हनों के पूरे परिवार भारत नहीं आ सके। सिंध की आरती मई 2025 में बॉर्डर बंद होने से रुक गई थीं, जो बाद में मस्कट के रास्ते नागपुर पहुंचकर शादी के बंधन में बंधीं।
इसी तरह सिंध के घोटकी से राभेल जसवाणी नामक दूल्हा भी अपने माता-पिता के साथ नागपुर पहुंचा और श्रिया से विवाह किया। मस्कट और अन्य खाड़ी देशों के रास्तों ने इन परिवारों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
