नई दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: समापन पर सुधारों और आपूर्ति श्रृंखला पर जोर

नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते पीएम नरेंद्र मोदी।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 13 सितंबर को संपन्न हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्र को संबोधित करते हुए आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, नवाचार और बहुपक्षीय सुधारों पर जोर दिया। सम्मेलन के समापन पर भारत ने ब्रिक्स की अगली अध्यक्षता वर्ष 2027 के लिए चीन को सौंपी।

18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में संपन्न, भारत ने चीन को सौंपी अध्यक्षता

देश की राजधानी नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहा दो दिवसीय 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन रविवार को संपन्न हो गया। समापन सत्र के दौरान भारत ने ब्रिक्स की घूर्णन (रोटेटिंग) अध्यक्षता वर्ष 2027 के लिए आधिकारिक रूप से चीन को सौंप दी है।

पीएम मोदी का संबोधन: विचारों से आगे बढ़कर ठोस परिणामों की जरूरत

समापन सत्र ‘लचीलापन, नवाचार, सहकारिता और स्थिरता’ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ब्रिक्स अपने तीसरे दशक में प्रवेश करने जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया अब इस समूह से केवल विचारों और प्रतिबद्धताओं के बजाय ठोस और व्यावहारिक परिणामों की उम्मीद करती है।

प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों के राजनीतिकरण पर चेतावनी

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी में पीएम मोदी ने प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों के हथियारीकरण (वेपनाइजेशन) और संरक्षणवादी बाधाओं के प्रति आगाह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की नीतियां वैश्विक और साझा विकास के रास्ते में बाधाएं उत्पन्न करती हैं।

भारत की पहल: तीन प्रमुख वैश्विक तंत्रों की शुरुआत

विस्तारित ब्रिक्स समूह के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को गहरा करने के लिए भारत ने तीन मुख्य रूप रेखा प्रस्तुत कीं:

  • ब्रिक्स लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन कोऑपरेशन फ्रेमवर्क (आर्थिक मजबूती के लिए)
  • स्टार्टअप इनोवेशन फंड (तकनीकी साझेदारी के लिए)
  • डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क (किसानों और एग्रीटेक सहायता के लिए)

जन-केन्द्रित सहयोग और नई दिल्ली घोषणापत्र

प्रधानमंत्री ने कहा कि वास्तविक सहयोग केवल सरकारी स्तर तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसमें उद्यमियों, किसानों, शोधकर्ताओं, महिलाओं और युवाओं को सीधे शामिल किया जाना चाहिए।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिखर सम्मेलन में अपनाया गया ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ ब्रिक्स के साझा दृष्टिकोण को एक स्पष्ट दिशा प्रदान करेगा और सभी निर्णयों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

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