दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने सोमवार (14 सितंबर 2026) को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा स्थित ‘दिल्ली डिजल्स’ पेट्रोल पंप पर 2020 के दंगों के दौरान पुलिस कर्मियों पर हमला करने के मामले में 5 आरोपियों को दोषी करार दिया। हालांकि, अदालत ने आगजनी के आरोपों से आरोपियों को बरी कर दिया।
2020 उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगे: कड़कड़डूमा अदालत का फैसला
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा क्षेत्र में हुए 2020 के दंगों से जुड़े एक मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने पांच व्यक्तियों को दोषी ठहराया है। एडिशनल सेशंस जज प्रवीण सिंह ने यह फैसला सुनाया। हालांकि, अदालत ने इन सभी आरोपियों को पेट्रोल पंप में आगजनी करने के आरोपों से बरी कर दिया है।
अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए पांच आरोपी अदालत ने जिन पांच व्यक्तियों को दोषी करार दिया है, उनके नाम आरिफ, मोहम्मद खालिद, अब्दुल सत्तार, तनवीर अली और हुनैन हैं।
अदालत ने इन्हें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 152, 186, 353 और धारा 149 के तहत दोषी माना है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में सफल रहा कि आरोपी उस भीड़ का हिस्सा थे जिसने ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों पर हमला किया था। इस हमले के बाद पुलिस कर्मियों ने पेट्रोल पंप की दीवार फांदकर अपनी जान बचाई थी।
अभियोजन पक्ष की दलीलें और गवाहियां दिल्ली पुलिस के अनुसार, 24 फरवरी 2020 को यह सूचना मिली थी कि भजनपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत यमुना विहार सर्विस रोड पर स्थिति ‘दिल्ली डिजल्स’ नामक पेट्रोल पंप पर एक बड़ी भीड़ एकत्र हुई थी। जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो वहां 100 से 150 लोगों की भीड़ मौजूद थी, जो चांद बाग क्षेत्र से सड़क पार करके आई थी और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ नारेबाजी कर रही थी।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 26 गवाहों के बयान दर्ज किए। अदालत ने आठ व्यक्तियों—जिन्में पांच पुलिस कर्मी और पेट्रोल पंप के कर्मचारी शामिल थे—की गवाहियों पर भरोसा जताया और उल्लेख किया कि उनके बयान एक-दूसरे के अनुकूल थे।
सजा पर बहस अलग से होगी अदालत ने स्पष्ट किया है कि दोषियों की सजा की अवधि पर बहस अलग से की जाएगी। उल्लेखनीय है कि फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए भयंकर दंगों के दौरान कुल 53 लोगों की जान चली गई थी और लगभग 200 लोग घायल हुए थे।
