बिहार बाल श्रम मामला: गया के मासूम की हैदराबाद में मौत, गरीबी लाचारी बनी

बिहार के गया जिले के फतेहपुर गांव में मजदूरी पर निर्भर और बदहाली में जीवन यापन करते ग्रामीण

बिहार के गया जिले के फतेहपुर गांव से हैदराबाद काम की तलाश में भेजे गए 11 वर्षीय बालक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। गरीबी और लाचारी के कारण बाल श्रम और मानव तस्करी का शिकार बने इस बच्चे का अंतिम संस्कार भी परिजनों को नसीब नहीं हुआ।

बिहार में गरीबी और लाचारी का खेल: बाल श्रम के दलदल में फंस रहे मासूम

गया। बिहार के गया जिले अंतर्गत इमामगंज थाना क्षेत्र के फतेहपुर गांव से बाल श्रम और मानव तस्करी की एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। गांव की सरिता देवी ने करीब दो महीने पहले अपने 11 वर्षीय बेटे को 1,000 रुपये अग्रिम राशि और 7,500 रुपये मासिक वेतन के वादे पर हैदराबाद भेजा था। परिजनों को आश्वासन दिया गया था कि बच्चे को अच्छा खाना और काम सीखने का अवसर मिलेगा।

हालांकि, दो महीनों के दौरान परिजनों की बच्चे से कोई बातचीत नहीं कराई गई। अंततः परिजनों को केवल यह सूचना मिली कि उनके बच्चे की मौत हो चुकी है और उसका अंतिम संस्कार भी किया जा चुका है। पीड़िता सरिता देवी ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वह अपने बेटे का अंतिम संस्कार भी नहीं कर सकीं।

चूड़ी फैक्ट्री में यातना और दोस्त की मौत का खुलासा

फतेहपुर गांव के ही 12 वर्षीय आशुतोष (बदला हुआ नाम) को भी जुलाई में हैदराबाद की एक चूड़ी फैक्ट्री ले जाया गया था। वह किसी तरह वहां से भागकर अपने घर लौटने में सफल रहा।

आशुतोष के शरीर पर अभी भी शारीरिक प्रताड़ना के निशान मौजूद हैं। उसने बताया कि फैक्ट्री में बच्चों को समय पर खाना नहीं दिया जाता था और बेरहमी से पीटा जाता था। उसने खुलासा किया कि मालिक द्वारा लोहे की रॉड से हमला करने के कारण उसके दोस्त की मौत हो गई थी, जिसके बाद उसे और एक अन्य साथी को ट्रेन में बैठाकर वापस भेज दिया गया।

गरीबी और दलालों का जाल

आशुतोष की चाची शांति देवी ने बताया कि परिवार में एक ही कमाने वाला व्यक्ति होने के कारण गुजारा मुश्किल हो रहा था। गांव के ही एक व्यक्ति ने बहला-फुसलाकर और 1,000 रुपये का लालच देकर बच्चे को काम के लिए भेजा था।

गया के इस गांव में रहने वाले अधिकतर परिवार दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर हैं। आर्थिक तंगी के कारण दलाल इन परिवारों को आसानी से अपना शिकार बना रहे हैं, जिससे मासूम बच्चे बाल श्रम और तस्करी के खौफनाक चक्र में फंसते जा रहे हैं।

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