नागपुर मंडल में मालगाड़ी के पटरी से उतरने के बाद भारतीय रेलवे ने शंटिंग कार्यों के दौरान मानवीय त्रुटियों को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय कड़े कर दिए हैं। रेलवे बोर्ड ने स्टेशन और यार्ड में लोको पायलटों तथा शंटरों के लिए 9 अक्टूबर तक विशेष काउंसलिंग सत्र आयोजित करने के निर्देश जारी किए हैं।
भारतीय रेलवे ने शंटिंग कार्यों में सुरक्षा बढ़ाई, मानवीय भूल रोकने के लिए निर्देश जारी
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने ट्रेन शंटिंग संचालन के दौरान मानवीय त्रुटियों को रोकने और रेल सेवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जून माह में नागपुर मंडल में शंटिंग के दौरान एक मालगाड़ी के पटरी से उतरने की घटना के बाद रेलवे बोर्ड ने यह कदम उठाया है।
रेलवे बोर्ड के निर्देशानुसार, विभिन्न स्टेशनों और रेलवे यार्डों में तैनात शंटरों और क्रू मेंबर्स के लिए विशेष काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। 9 अक्टूबर तक चलने वाले इन सत्रों में यार्ड के नक्शों के जरिए कर्मचारियों को ट्रैक लेआउट, पॉइंट्स, टर्नआउट और मूवमेंट प्रतिबंधों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है।
शंटिंग में लापरवाही से प्रभावित होती हैं रेल सेवाएं
रेलवे यार्डों में शंटिंग के दौरान पॉइंट्स या ट्रैक रूटिंग में जरा सी चूक का असर मुख्य रेल मार्गों पर पड़ता है। गलत पॉइंट सेट होने या अनधिकृत मूवमेंट के कारण यदि कोई बोगी पटरी से उतरती है, तो उससे मुख्य लाइनों पर परिचालन बाधित हो जाता है।
एक लोको पायलट के अनुसार, यार्ड में लगातार कई रेक और लोकोमोटिव की आवाजाही होती है। किसी एक लोको में खराबी या पटरी से उतरने की स्थिति में बहाली कार्य में 3 से 5 घंटे तक का समय लग जाता है। इस दौरान उसी रूट से गुजरने वाली कई यात्री ट्रेनें लेट हो जाती हैं।
हाल ही में गाजियाबाद में हुई एक ट्रेन के डिरेलमेंट के कारण भी एक लाइन बाधित हो गई थी, जिससे यार्ड की क्षमता प्रभावित हुई और अन्य ट्रेनों की आवाजाही पर असर पड़ा था। रेलवे प्रशासन का मानना है कि काउंसलिंग से कर्मचारियों की सतर्कता बढ़ेगी और हादसों पर रोक लगेगी।
