नेपाल में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के नेता बालेन शाह रामनवमी, 27 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। उनका चुनाव अभियान सीताजी की जन्मभूमि जनकपुर से शुरू हुआ था। बालेन शाह के रामायण प्रतीकों के इस्तेमाल ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है।
बालेन शाह नेपाल के पीएम पद की शपथ रामनवमी पर
नेपाल के हालिया चुनाव में शानदार जीत हासिल करने वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के नेता बालेन शाह इस साल रामनवमी यानी 27 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे।
उनका चुनावी अभियान जनकपुर से शुरू हुआ था, जो भगवान राम की जन्मभूमि के रूप में प्रसिद्ध है। उनके रामायण प्रतीकों के इस्तेमाल ने सोशल मीडिया पर चर्चा बढ़ा दी है।
हिंदू प्रतीकों और संस्कृति का इस्तेमाल
बालेन शाह ने सीधे तौर पर धर्म आधारित राजनीति का ऐलान नहीं किया है, लेकिन उनके कई निर्णयों को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और हिंदू प्रतीकों से जोड़ा गया है।
काठमांडू के मेयर रहते हुए उन्होंने बॉलीवुड फिल्म ‘आदिपुरुष’ पर प्रतिबंध लगाया था। उनका कहना था कि फिल्म में सीता को भारत की बेटी बताना गलत है क्योंकि वह जनकपुर, नेपाल में जन्मी थीं।
नेपाल की राजनीतिक पहचान और राष्ट्रीय संस्कृति
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के रिटायर्ड प्रोफेसर एस.डी. मुनि का कहना है कि बालेन शाह के कदम को हिंदू राजशाही का महिमामंडन नहीं मानना चाहिए। यह देश के हिंदुओं के लिए संकेत है।
उनके समर्थक युवा हैं और वे राजशाही विरोधी भी हैं। प्रोफेसर संजय भारद्वाज के अनुसार, शाह यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि वे हिंदू धर्म से दूर नहीं हैं, जैसा कि पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड और के.पी. शर्मा ओली करते रहे हैं।
सार्वजनिक निर्णय और राष्ट्रीय गौरव
शाह ने अपने ऑफिस में ‘ग्रेटर नेपाल’ का नक्शा लगाया, जिसमें वर्तमान भारत के कुछ हिस्सों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया। यह कदम भी उनकी सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय गौरव को दर्शाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बालेन शाह प्रतीकों का इस्तेमाल नेपाली स्वाभिमान और संस्कृति को दिखाने के लिए करते हैं, लेकिन उन्हें धर्म केंद्रित राजनीति करने वाला नेता कहना अभी जल्दबाजी होगी। उनका मुख्य फोकस पुरानी राजनीतिक व्यवस्था को बदलने पर रहा है।
