झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिसकर्मियों को एसीपी और एमएसीपी लाभ देने के मामले में राज्य सरकार द्वारा दायर लेटर्स पेटेंट अपील को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ के इस फैसले से राज्य के लगभग 60 से 70 हजार पुलिसकर्मियों को सीधा वित्तीय लाभ मिलेगा।
पुलिसकर्मियों के पक्ष में झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
झारखंड पुलिस के सिपाही संवर्ग और अन्य कर्मियों को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (ACP) और मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACP) लाभ से जुड़े मामले में राज्य सरकार द्वारा दायर लेटर्स पेटेंट अपील (LPA) को खारिज कर दिया है।
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब पुलिसकर्मियों को 10, 20 और 30 वर्ष की नियमित सेवा पूरी करने पर मिलने वाले वित्तीय उन्नयन लाभ के लिए प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) पूर्ण करने की अनिवार्यता समाप्त हो जाएगी।
60 से 70 हजार कर्मियों को मिलेगा सीधा लाभ
हाईकोर्ट के इस महत्वपूर्ण निर्णय से राज्य के हजारों पुलिसकर्मियों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। प्राप्त विवरण के अनुसार, इस आदेश का सीधा लाभ झारखंड पुलिस के लगभग 60 से 70 हजार कर्मियों को प्राप्त होगा।
भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, लाभान्वित होने वाले इन कर्मचारियों में मुख्य रूप से सिपाही, हवलदार और अन्य समकक्ष पदों पर कार्यरत पुलिसकर्मी शामिल हैं। इस फैसले से पुलिस संगठनों में खुशी की लहर है।
450 दिनों की देरी से दायर की गई थी सरकारी अपील
दरअसल, पुलिसकर्मियों को एसीपी (ACP) और एमएसीपी (MACP) का लाभ देने को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। राज्य सरकार ने इन लाभों को प्रशिक्षण पूरा करने की अनिवार्य शर्त से जोड़ रखा था, जिसका पुलिसकर्मी संगठनों ने कड़ा विरोध किया था। इस संबंध में दायर पूर्व याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 16 अगस्त 2024 को पुलिसकर्मियों के पक्ष में फैसला सुनाया था।
एकल पीठ के इस फैसले से असहमत होकर राज्य सरकार ने बाद में खंडपीठ में लेटर्स पेटेंट अपील (LPA) दायर की थी। हालांकि, सरकार की ओर से यह अपील निर्धारित समयसीमा के काफी बाद, लगभग 450 दिनों की देरी से प्रस्तुत की गई थी, जिसका पुलिसकर्मी संगठनों ने पुरजोर विरोध किया।
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सुनाया अंतिम फैसला
अदालत में हुई सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने सरकार की ओर से हुई देरी के कारणों का विस्तृत परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि अपील दाखिल करने में हुई इस लंबी देरी को उचित ठहराने के लिए राज्य सरकार की तरफ से कोई पर्याप्त और संतोषजनक आधार प्रस्तुत नहीं किया गया है।
इसके बाद मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार की इस लेटर्स पेटेंट अपील को पूरी तरह से खारिज कर दिया। इस फैसले से लंबित मामलों के समाधान का रास्ता साफ हो गया है।
