कथित धर्म परिवर्तन को लेकर आदिवासी परिवार का बहिष्कार

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में कथित धर्म परिवर्तन के बाद उपजे तनाव को देखते हुए तैनात अर्धसैनिक बल।

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिला मुख्यालय के पास स्थित खड़का गांव में कथित धर्म परिवर्तन और आदिवासी रीति-रिवाजों की अनदेखी करने को लेकर ग्रामीणों ने एक ही परिवार के सात सदस्यों का सामाजिक बहिष्कार कर उन्हें गांव से बाहर निकालने का प्रयास किया।

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में कथित धर्म परिवर्तन पर विवाद, पुलिस बल तैनात

नारायणपुर: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिला मुख्यालय के समीप स्थित खड़का गांव में कथित धार्मिक धर्मांतरण और पारंपरिक रीति-रिवाजों को छोड़ने के आरोप में एक आदिवासी परिवार को ग्रामीणों के भारी विरोध और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है। गांव में पारंपरिक आदिवासी प्रथाओं को मानने वाले ग्रामीणों और दूसरे धर्म को अपनाने वाले एक परिवार के बीच पिछले कुछ समय से तनाव की स्थिति बनी हुई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित परिवार गांव की पारंपरिक आदिवासी ‘पेन’ (देवता) व्यवस्था, सामाजिक मानदंडों और सांस्कृतिक परंपराओं का पालन नहीं कर रहा है, जिससे गांव का सामाजिक ताना-बाना और पारंपरिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

परिवार के सात सदस्यों को गांव से बाहर निकालने का प्रयास

यह विवाद उस समय अत्यधिक बढ़ गया जब हाल ही में ग्रामीणों ने परिवार के सात सदस्यों से गांव छोड़कर जाने की मांग की और उनके दैनिक उपयोग के सामान को गांव की सीमा से बाहर ले जाने का प्रयास किया। इस घटनाक्रम की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन के अधिकारी और भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचे। प्रशासनिक और पुलिस टीम ने ग्रामीणों को इस कार्रवाई से रोका और दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता व शांति स्थापित करने के प्रयास शुरू किए। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए अर्धसैनिक सुरक्षा बलों को भी मुस्तैद रखा गया है। Bharat Manthan Live News इस संवेदनशील मामले पर प्रशासनिक कार्रवाई की निष्पक्ष रिपोर्ट आप तक पहुंचा रहा है।

संत रामपाल और ईसाई धर्म अपनाने का आरोप

ग्रामीणों के अनुसार, परिवार के मोहन दुग्गा और कुछ अन्य सदस्य संत रामपाल महाराज के अनुयायी हैं और उनके द्वारा बताए गए धार्मिक सिद्धांतों का पालन करते हैं। वहीं, परिवार के बुजुर्ग सदस्यों के संबंध में ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने ईसाई धर्म का पालन करना शुरू कर दिया है, जिसके कारण गांव के भीतर सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बाहरी धार्मिक प्रभावों और धर्मांतरण के कारण गांव की एकता और सांस्कृतिक पहचान के साथ समझौता किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस परिवार को पहले भी समझाया गया था और आदिवासी परंपराओं में लौटने का आग्रह किया गया था, लेकिन वे इसके लिए सहमत नहीं हुए।

सामान को सीमा से बाहर निकाला, घरों को नहीं पहुंचाया नुकसान

मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीण राजमन कुमेती ने कहा, “हम उन लोगों को बाहर निकाल रहे हैं जिन्होंने अवैध रूप से धर्म परिवर्तन किया है। हमने उन्हें धर्म न बदलने की सलाह दी थी। हमने उन्हें गांव में जमीन और अन्य सुविधाएं भी प्रदान की थीं। हमारे रोकने के प्रयासों के बावजूद उन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया, इसीलिए हम उन्हें बाहर निकाल रहे हैं। फिलहाल हमने केवल उनका सामान हटाया है, हमने उनके घरों को नहीं तोड़ा है या ऐसा कुछ नहीं किया है।” वर्तमान में प्रशासन दोनों पक्षों को शांत कराकर कानून व्यवस्था बनाए रखने में जुटा हुआ है।

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