प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के इतर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की और अमेरिका द्वारा ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने के बाद बढ़े क्षेत्रीय तनाव के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की।
द्विपक्षीय वार्ता और क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में भाग लेने पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान का भारत आगमन पर स्वागत किया गया। राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है। दोनों नेताओं के बीच दो सप्ताह से भी कम समय में यह दूसरी मुलाकात है।
भारत-ईरान संबंध और ब्रिक्स की भूमिका
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि भारत और ईरान के बीच मजबूत सांस्कृतिक व ऐतिहासिक संबंध हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देश ब्रिक्स साझेदार के रूप में साझा प्रगति और समृद्धि में योगदान देने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
नई दिल्ली रवाना होने से पहले ईरानी राष्ट्रपति ने ब्रिक्स की आर्थिक मजबूती पर जोर दिया था। उन्होंने कहा कि नया ब्रिक्स बैंक सदस्य देशों को अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता से मुक्त करने और अमेरिकी प्रभुत्व के खिलाफ खड़ा करने के लिए बनाया गया है।
शांति की अपील और नौवहन की स्वतंत्रता
इससे पहले 31 अगस्त को बिश्केक में हुई बैठक के दौरान पीएम मोदी ने संघर्ष को समाप्त करने के प्रयासों का समर्थन किया था। वहीं राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने भारत से अपनी कूटनीतिक पहुंच का उपयोग कर क्षेत्र को युद्ध से दूर करने और बातचीत के रास्ते पर लाने में मदद का आग्रह किया था।
वार्ता के दौरान भारतीय पक्ष ने क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के साथ-साथ नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया।
