चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस ने राम मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित हेराफेरी की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई है। पार्टी ने इस कथित गबन को हिंदुओं की आस्था पर हमला बताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की कार्रवाई को महज दिखावा करार दिया है।
चंडीगढ़ में शुक्रवार को पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग की उपस्थिति में आयोजित एक संयुक्त प्रेसवार्ता के दौरान कांग्रेस पार्टी ने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित वित्तीय हेराफेरी का मामला प्रमुखता से उठाया। पार्टी ने इस पूरे प्रकरण की उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की देखरेख में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की है।
एसआईटी जांच को बताया महज दिखावा
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि कथित अनियमितताओं की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) सिर्फ एक दिखावा है। उन्होंने कहा कि इस घटना ने भगवान राम में गहरी आस्था रखने वाले करोड़ों लोगों को बहुत आहत किया है। श्रीनेत ने इसे केवल धोखाधड़ी या करोड़ों रुपयों के गबन का मामला न मानकर हिंदुओं की आस्था और उनके विश्वास पर सीधा हमला बताया है। उन्होंने मांग की कि एसआईटी की जांच रिपोर्ट को पूरी तरह सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
बड़ी मछलियों को छोड़ने का लगाया आरोप
भारत मंथन Live News के अनुसार, कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि वर्तमान जांच में सिर्फ छोटी मछलियों को ही गिरफ्तार किया गया है, जबकि बड़े और मुख्य लोगों को छोड़ दिया गया है। उन्होंने दान के पैसे का गबन करने वालों की तुलना ऐतिहासिक आक्रांता महमूद गजनवी से करते हुए कहा कि इन लोगों ने उसे भी पीछे छोड़ दिया है। इसके साथ ही उन्होंने हिंदुत्व के स्वयंभू संरक्षकों को धर्म के लिए कलंक करार दिया। श्रीनेत ने दावा किया कि भाजपा और आरएसएस ने राम मंदिर के प्रबंधन के लिए बनाए गए ट्रस्ट में अपने सदस्यों को शामिल किया है।
प्रधानमंत्री की चुप्पी पर उठाए सवाल
श्रीनेत ने जांच की प्रगति को सार्वजनिक न किए जाने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस विषय पर चुप्पी पर सीधे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए। यदि यह सब कुछ समय से चल रहा था और सरकार को इसकी जानकारी नहीं थी, तो यह सरकार की नाकामी को दर्शाता है। वहीं, हरियाणा कांग्रेस मुख्यालय में वरिष्ठ कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल ने भी पत्रकारों से चर्चा करते हुए उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच कराने और मंदिर ट्रस्ट को तत्काल भंग करने की मांग दोहराई।
