विधानसभा कर्मी अंजना तिवारी की मौत पर अस्पताल में बवाल

रांची विधानसभा परिसर में महिला कर्मी अंजना तिवारी की मौत के विरोध में प्रदर्शन करते कर्मचारी

रांची के सेंटेविटा अस्पताल में इलाज के दौरान झारखंड विधानसभा की महिला कर्मी अंजना तिवारी की मौत के बाद बवाल मच गया. मंगलवार, 26 मई 2026 को गुस्साए कर्मचारियों ने विधानसभा परिसर में शव रखकर धरना दिया. परिजनों ने निजी अस्पताल पर गॉल ब्लाडर के ऑपरेशन के दौरान लापरवाही बरतने का गंभीर आरोप लगाया है.

रांची के निजी अस्पताल में लापरवाही का आरोप, विधानसभा परिसर में शव रखकर कर्मियों का हंगामा

रांची: झारखंड की राजधानी रांची में झारखंड विधानसभा की महिला कर्मी अंजना तिवारी की इलाज के दौरान हुई मौत के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है. इस घटना ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. भारत मंथन लाइव न्यूज को मिली जानकारी के अनुसार, मौत की खबर फैलते ही विधानसभा कर्मियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है.

गुस्साए कर्मचारियों ने न्याय की मांग को लेकर विधानसभा परिसर में ही शव रखकर धरना शुरू कर दिया है. आंदोलनकारी कर्मी दोषी डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं.

खुद पैदल चलकर अस्पताल गई थीं अंजना तिवारी: परिजन

मृतक अंजना तिवारी के परिजनों का कहना है कि वह पूरी तरह सामान्य स्थिति में थीं. वह गॉल ब्लाडर के ऑपरेशन के लिए खुद पैदल चलकर सेंटेविटा अस्पताल पहुंची थीं. परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि इलाज के दौरान बरती गई घोर लापरवाही की वजह से ही उनकी जान गई है. इस आकस्मिक घटना से परिवार और सहकर्मियों को गहरा सदमा लगा है.

विधायक जयराम महतो ने की 5 विधायकों की जांच कमेटी बनाने की मांग

इस संवेदनशील मामले को लेकर विधायक जयराम महतो ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने आंदोलनरत विधानसभा कर्मियों की मांगों का पुरजोर समर्थन किया. जयराम महतो ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब किसी निजी अस्पताल पर लापरवाही के आरोप लगे हों. उन्होंने आरोप लगाया कि कई निजी अस्पताल मरीजों के इलाज से ज्यादा पैसे कमाने पर ध्यान दे रहे हैं और मरीज को इंसान की जगह सिर्फ एक उपभोक्ता की तरह देखा जा रहा है.

“इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए. जांच की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सिविल सर्जन स्तर के बजाय विधानसभा के पांच विधायकों की एक विशेष जांच कमेटी गठित की जानी चाहिए.” — जयराम महतो, विधायक

प्रशासनिक जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल

विधायक जयराम महतो ने सिविल सर्जन स्तर पर होने वाली पारंपरिक जांच प्रक्रियाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि ऐसी विभागीय जांचों में अक्सर कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आता है, क्योंकि कई निजी अस्पतालों का प्रशासनिक स्तर पर काफी प्रभाव रहता है जिसके कारण कार्रवाई प्रभावित हो जाती है. अंत में उन्होंने अंजना तिवारी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग को दोहराया.

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